पूरनपुर। जंगल से निकलकर आबादी क्षेत्र में आने वाले बाघ, तेंदुआ और अन्य वन्यजीवों को पकड़कर उन्हें सुरक्षित रखने के लिए पूरनपुर में करीब 19 करोड़ रुपये की लागत से रेस्क्यू सेंटर बनाया जा रहा है। रेस्क्यू सेंटर बन जाने के बाद आबादी क्षेत्र में आने पर वन्य जीवों को तुरंत पकड़ा जा सकेगा।
करीब दो साल पहले राज्य वन्य जीव बोर्ड की बैठक में पीलीभीत समेत चार जिलों में रेस्क्यू सेंटर बनाने का निर्णय लिया गया था। प्रस्ताव को केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (सीजेजेडए) से हरी झंडी मिलने के बाद केंद्र ने प्रतिपूरक वनीकरण कोष प्रबंधन और योजना प्राधिकरण के तहत बजट जारी कर दिया। पूरनपुर में पीलीभीत रोड पर सामाजिक वानिकी कार्यालय के समीप वनकिया में पांच हेक्टेयर जमीन पर एक साल पहले इसका निर्माण शुरू किया गया था।
निर्माण की जिम्मेदारी सीएनडीएस को दी गई है। अब तक चहारदीवारी का निर्माण कर उसके ऊपर कटीले तार की फेंसिंग की जा चुकी है। अस्पताल और दो क्वारंटीन कक्षों का ढांचा तैयार होने के बाद उस पर प्लास्टर और टाइल्स लगाने का काम किया जा रहा है। 14 खुले बाड़े, रेस्क्यू कक्ष, आवास आदि अभी बनने हैं। निर्माण कार्य बेहद धीमी गति से हो रहा है, लिहाजा रेस्क्यू सेंटर के मार्च तक चालू हो पाने की उम्मीद नहीं है।
आबादी क्षेत्र में आने वाले वन्य जीव यहां रखे जाएंगे
बाघ, तेंदुआ, भालू आदि हिंसक वन्यजीव अक्सर जंगल से निकलकर आबादी वाले क्षेत्रों में आ जाते हैं। नेपाली हाथी भी इलाके में आकर खूब तबाही मचाते है। जंगल से निकलकर आबादी वाले हिस्सों में आने वाले वन्य जीवों को पकड़कर उन्हें सुरक्षित तरीके से रखने और समुचित इलाज के लिए रेस्क्यू सेंटर बनाया जा रहा है।
अलग-अलग होंगे बाड़े और क्वारंटीन कक्ष
वन्य जीव रेस्क्यू सेंटर में दो क्वारंटीन कक्ष बनाए जा रहे हैं। आबादी से रेस्क्यू कर लाए जाने वाले वन्य जीवों को सबसे पहले इसमें रखा जाएगा। परिसर में 14 खुले बाड़े बनेंगे। वन्य जीवों के लिए तालाब भी बनाया जाएगा। इसमें सोलर पंप से पानी भरने की व्यवस्था होगी। एक अस्पताल और कर्मचारी आवास बनेंगे।
जंगल में रहने का अभ्यस्त बनाने के लिए खुले बाड़ों में रखे जाएंगे
वन्य जीव रेस्क्यू सेंटर में आबादी से पकड़कर लाए जाने वाले वन्य जीवों को क्वारंटीन करने के बाद, अस्पताल में उनकी बीमारी का इलाज होगा। इस दौरान वन्य जीवों को रखने के लिए अलग-अलग बाड़े होंगे। वन्य जीवों के पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद उनको खुले बाड़ों में रखा जाएगा, ताकि वे जंगल में रहने के अभ्यस्त हो सकें। इसके बाद उन्हें जंगल में छोड़ा जाएगा।