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Pilibhit News: अब एक यूनिट खून से तीन मरीजों की बचाई जा सकेगी जान

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पीलीभीत। स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय के ब्लड बैंक में सेपरेशन यूनिट संचालित करने के लिए सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल आर्गेनाइजेशन ने लाइसेंस जारी कर दिया है। लाइसेंस मिलने के अब बाद एक यूनिट खून से तीन मरीजों की जान बचाई जा सकेगी।
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जिला अस्पताल के ब्लड बैंक की वर्तमान में क्षमता 600 यूनिट है। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध होने के बाद एनएमसी की नीतियों पर खरा उतरने को लेकर यहां सुविधाओं को बढ़ाया जाना था। साथ ही लैब टेक्नीशियनों की संख्या भी बढ़ाई जानी थी। इसके लिए ब्लड बैंक की ओर से शासन को सेपरेशन यूनिट संचालन के लिए लाइसेंस जारी करने के लिए पत्राचार किया गया।
लंबे समय तक पत्राचार होने के बाद ब्लड बैंक को सेपरेशन यूनिट की सौगात तो करीब दो माह पूर्व मिल गई लेकिन इसके संचालन के लिए सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल आर्गेनाइजेशन की ओर से लाइसेंस उस समय जारी नहीं किया गया।
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अब एक माह के लंबे इंतजार के बाद सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल आर्गेनाइजेशन की ओर से लाइसेंस जारी कर दिया गया है। जल्द ही यह यहां मेडिकल कॉलेज को मिल जाएगा। इसके बाद सेपरेशन यूनिट का संचालन शुरू कर दिया जाएगा।
सेपरेशन यूनिट के संचालन से ब्लड बैंक की क्षमता 600 से बढ़कर करीब 1400 यूनिट तक पहुंच जाएगी। सेपरेशन यूनिट के संचालन से एक यूनिट खून तीन मरीजों को जरूरत के अनुसार दिया जा सकेगा।


रक्त से अलग किए जाएंगे ये कंपोनेंट्स
ब्लड में चार कंपोनेंट होते हैं। इनमें रेड ब्लड सेल (आरबीसी), प्लाज्मा, प्लेटलेट्स और क्रायोप्रेसीपिटेट शामिल हैं। सेपरेशन यूनिट में ब्लड को घुमाया (मथा) जाता है। इससे ब्लड परत दर परत (लेयर बाई लेयर) हो जाता है और आरबीसी, प्लाज्मा, प्लेटलेट्स और क्रायोप्रेसीपिटेट अलग हो जाते हैं।

इन मरीजों को होगा लाभ
सेपरेशन यूनिट के संचालन के बाद डेंगू के मरीजों को प्लेटलेट्स और एनीमिया के मरीजों को आरबीसी की दिक्कत नहीं होगी। इसके अलावा अब प्लाज्मा भी अलग से मिल सकेगा।



सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल आर्गेनाइजेशन ने ब्लड बैंक में सेपरेशन यूनिट के संचालन के लिए लाइसेंस जारी कर दिया गया है। जल्द ही शासन से लाइसेंस यहां आ जाएगा। इसके बाद सेपरेशन यूनिट का संचालन शुरू हो जाएगा।
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- डॉ. संगीता अनेजा, प्राचार्य
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