न टंकी से पानी मिला, न काम आई पुलिया
जनता को सुविधाएं देने के नाम पर जिले में कराए गए करोड़ों के निर्माण बेकार साबित हो रहे हैं। चाहे बरखेड़ा और पूरनपुर में करोड़ों की लागत से बना आईटीआई हो या जमुनिया में पानी की टंकी। बरखेड़ा और माधोटांडा में बनी सीएचसी भवन भी सफेद हाथी बने हुए हैं। वहीं शहर में नौगवां ओवरब्रिज का निर्माण एक साल में भी पूरा नहीं हो पाया है। सरकार बनने के बाद जिले में विकास के नाम पर माधोटांडा क्षेत्र की जमुनिया आसपुर ग्राम पंचायत में पेयजल उपलब्ध कराने को पानी की टंकी बनवाकर पाइप लाइन डाली गई है लेकिन तकनीकी खरीबी के कारण इसका उपयोग आज तक नहीं हो पाया है। इससे करोड़ों की लागत से बनी पानी की टंकी अनुपयोगी साबित हो रही है। इसी ग्राम पंचायत में मंदिर तक जाने के लिए आठ लाख की लागत से पुलिया का निर्माण कराया गया, जबकि इसके दोनों ओर मनरेगा से मिट्टी कार्य दर्शाकर रकम डकार ली गई परिणाम स्वरूप पुलिया का निर्माण व्यर्थ साबित हो रहा है। इसके अलावा बरखेड़ा और पूरनपुर में लगभग तीन तीन करोड़ की लागत से आईटीआई स्वीकृत हुआ। लेकिन लगभग ढाई साल में भी स्वीकृत धनराशि के अनुरूप बजट न मिलने से इसका निर्माण पूरा नहीं हो सका है। जिले में ग्रामीण क्षेत्रों में वोटरों को लुभाने के लिए कई ऐसे मार्गों पर यात्री शेड बनवा दिए गए हैं, जिन मार्गो पर वाहन ही नहीं चलते। वहीं कुछ यात्री शेड में तो दुकानें चल रही हैं।
डेढ़ साल में भी नहीं बन पाया नौगवां ओवरब्रिज
शहर में नौगवां रेलवे क्रासिंग को करीब दो साल पहले मंजूरी मिली थी। बजट मिलने पर डेढ़ साल पहले इसका निर्माण शुरू हुआ था लेकिन इस क्षेत्र में आ रहे पेड़ों को काटने की अनुमति न मिलने के कारण काम अभी तक पूरा नहीं हो सका है। हालांकि अब एनओसी मिलने पर पेड़ कटे जा रहे हैं जिससे आगामी छह माह में काम पूरा होने की उम्मीद है।