पीलीभीत। जिला महिला अस्पताल के चार डॉक्टर स्थानांतरित होने और उनके स्थान पर किसी के न आने से यहां की स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं। स्थिति यह हो गई है कि ओपीडी के लिए एक भी महिला चिकित्सक नहीं है। सीएमएस को प्रशासनिक कार्य निपटाने के साथ अपने कक्ष में ही मरीज देखने पड़ रहे हैं। ओपीडी कक्ष की जिम्मेदारी डॉ. अश्वनी कुमार गुप्ता संभाले हुए हैं। इमरजेंसी में बाहर से निजी चिकित्सक बुलाने पड़ते हैं।
महिला अस्पताल में एक दिन में सामान्य रूप से 250 मरीजों की ओपीडी होती है, लेकिन रविवार के अवकाश के बाद जब सोमवार को अस्पताल खुला तो पंजीकरण रजिस्टर में 327 मरीजों के नाम दर्ज हुए। लेकिन चार डॉक्टरों के तबादले की वजह से ओपीडी में एक भी महिला डाक्टर नहीं थी। सीएमएस ने प्रशासनिक कार्यों के बीच 78 मरीज देखे। वरिष्ठ परामर्शदाता के पद पर नियुक्त डॉ. अश्वनी कुमार गुप्ता ने शेष मरीज देखे। तमाम महिला मरीज संकोच में पुरुष चिकित्सक से अपनी परेशानी भी नहीं बता पाईं। ऐसी कई महिलाओं ने काफी इंतजार के बाद खुद को सीएमएस को दिखाया।
अस्पताल के रिकार्ड के मुताबिक डॉ. सुधा कुमारी और डॉ. विनीता चतुर्वेदी का तबादला फरवरी 2022 में हो गया था। उनके स्थान पर कोई चिकित्सक आतीं, उससे पहले डॉ. पुष्पा पंत और डॉ. अंजलि सिंह का भी स्थानांतरण कर दिया गया। इन दोनों के स्थान पर भी यहां किसी को नहीं भेजा गया है। डाक्टरों की कमी से न सिर्फ ओपीडी की सेवाएं बाधित हो रही हैं, बल्कि प्रसव सेवाओं पर भी असर है। सेवारत डॉक्टरों से प्रसव कक्ष में आठ के स्थान पर अब 12 घंटे की लगातार ड्यूटी ली जा रही है।
अस्पताल में 24 घंटे में 15-20 महिलाओं के प्रसव होते हैं। प्रसव कक्ष में स्त्री रोग विशेषज्ञ के साथ बाल रोग विशेषज्ञ और सर्जन की तैनाती होनी चाहिए। अस्पताल में तीन वर्ष से बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है। दो वर्ष से सर्जन का पद खाली है। इमरजेंसी में ऑन कॉल निजी चिकित्सक बुलाने पड़ते हैं। लेकिन जब निजी चिकित्सक अपने नर्सिंग में व्यस्त होते हैं तो वे सरकारी अस्पताल की कॉल को अधिक तवज्जो नहीं देते।
वरिष्ठ अधिकारियों को करा दिया अवगत: सीएमएस
सीएमएस डॉ. अनीता चौरसिया ने बताया कि डॉक्टर कम होने से मरीजों को दिक्कत है। सेवाओं के संचालन में असुविधा हो रही है। इस संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया है और उपलब्ध संसाधनों में बेहतर से बेहतर चिकित्सा सेवाएं दी जा रही हैं।
अल्ट्रासाउंड के लिए बरेली रेफर की जातीं मरीज
महिला मरीजों को अल्ट्रासाउंड के लिए बरेली रेफर किया जा रहा है। जो मरीज बरेली नहीं जाना चाहती हैं उनके लिए निजी अस्पतालों का विकल्प है लेकिन वहां उन्हें 500 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। महिला अस्पताल में 18 जुलाई से अल्ट्रासाउंड की सेवाएं बंद हैं।
आधा दिन लगा आने-जाने में
शहर से 12 किलोमीटर दूर न्यूरिया से आईं नाजरीन ने बताया कि महिला अस्पताल में त्वचारोग विशेषज्ञ नहीं मिला। न्यूरिया की ही फरहा ने बताया कि अल्ट्रासाउंड के लिए इंतजार करने की सलाह दी गई। जब पूछा कि कब तक इंतजार करें? जवाब मिला- जब तक किसी डाक्टर की पोस्टिंग नहीं हो जाती है, तब तक इंतजार करना पड़ेगा। जो डाक्टर अल्ट्रासाउंड करते हैं वो छुट्टी पर हैं।