कलीनगर। मानसून का समय नजदीक आते ही शारदा नदी के संवेदनशील इलाकों में बाढ़ बचाव कार्य शुरू न होने से ग्रामीण चिंतित हैं। गभिया सहराई गांव के लोगों का कहना है कि पिछले साल बरसात में नदी ने पत्थर की दो महत्वपूर्ण ठोकरों के अधिकांश भाग को काट दिया था। उसपर अबतक कार्य शुरू न होने से फिर नुकसान की संभावना बढ़ गई है।
शारदा नदी नेपाल के रास्ते नोमैंस लैंड क्षेत्र से जनपद सीमा में प्रवेश करती है। बरसात के दौरान नदी का विकराल रूप लोगों की बेचैनी बढ़ा देता है। पिछले सात बरसात के दौरान नदी ने तहसील क्षेत्र के कई इलाकों में महत्वपूर्ण बाढ़ नियंत्रण योजनाओं को काट दिया था। इससे आबादी क्षेत्र में भी नुकसान पहुंचा था। इसको रोकने के लिए दो माह पूर्व शारदा सागर खंड और बाढ़ खंड की ओर से बाढ़ बचाव कार्य शुरू कराए गए।
प्रशासन की ओर से कार्य को बरसात के पूर्व गुणवत्ता के साथ पूरा करने पर जोर भी दिया जा रहा है, लेकिन गभिया सहराई गांव के लोगों की बेचैनी बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछली बरसात में नदी ने गभिया सहराई गांव में दाहिने किनारे की ओर पत्थर की बनी ठोकर संख्या 18 व 19 को काफी नुकसान पहुंचाया था।
गनीमत रही थी कि बरसात के अंतिम समय में यहां भू-कटान शुरू नहीं हुआ था, वरना तटबंध भी खतरे में पड़ जाता। इधर दो माह पूर्व 10 करोड़ की लागत से नदी के भीतरे हिस्से में बनी ठोकरों की मरम्मत का कार्य कराया जा रहा है, लेकिन महत्वपूर्ण दोनों ठोकरों और उसके आसपास कोई भी ऐसा ठोस बाढ़ नियंत्रण कार्य अभी तक शुरू नहीं कराया जा सका। ऐसी ही स्थिति नौजल्हा नंबर एक में बनी हुई हैं। संवाद
गौरांग मजूमदार,- फोटो : रामखिलावन की फाइल फोटो।
गौरांग मजूमदार,- फोटो : रामखिलावन की फाइल फोटो।