पीलीभीत। चिकित्सकों के पद खाली होने से नवजात शिशु देखभाल इकाई (सिक न्यूबॉर्न केयर यूनिट) बंद हो गई। चार दिन से बीमार बच्चों को भर्ती नहीं किया जा रहा है। जिला महिला अस्पताल में स्थापित एसएनसीयू में छह डॉक्टरों की तैनाती होनी चाहिए। इस समय सिर्फ एक डॉक्टर ही तैनात है।
महिला अस्पताल में 24 घंटे में औसतन दस महिलाओं के प्रसव होते हैं। इसमें से दो नवराज ऐसे होते हैं, जिन्हें एसएनसीयू में भर्ती करने की जरूरत होती है। इसलिए अस्पताल परिसर में वर्ष 2016 में विशेष देखभाल इकाई की स्थापना की गई थी। इसके लिए तीन एमबीबीएस चिकित्साधिकारियों और तीन बाल रोग विशेषज्ञों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन फिलहाल यहां एक ही डॉक्टर तैनात है। इसके चलते इकाई में दो अगस्त से नवजात शिशु भर्ती नहीं किए जा रहे हैं।
जिन नवजात की गंभीर स्थिति होती है उन्हें निजी अस्पताल और बरेली के जिला अस्पताल में दिखाने की सलाह दी जा रही है। महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. अनीता चौरसिया ने इस स्थिति से सीएमओ और जिला अस्पताल के सीएमएस को अवगत कराया है, लेकिन शनिवार तक किसी भी बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं हो सकी है। फिलहाल डॉ. मुकेश मिश्रा की तैनाती है। इकाई के लिए दो डाक्टर थे।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. नुरुल कमर ने सेवाएं छोड़ दीं। वह संविदा पर थे। उनके बाद डॉ. मुकेश मिश्रा ने कहा है कि अगर डॉक्टर तैनात नहीं किए जाते हैं तो अकेले सेवाएं संचालित करना मुश्किल होगा। वह भी सेवाएं छोड़ने का नोटिस दे चुके हैं। इसलिए सीएमओ के जरिये जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ को बीमार बच्चों की इकाई के लिए संबद्ध किए जाने का आग्रह जिला अस्पताल के सीएमएस से किया गया है।
जिला अस्पताल में इमरजेंसी मेडिकल अफसर के चार पद हैं। तैनाती एक भी नहीं हैं। इमरजेंसी सेवाएं बाधित नहीं की जा सकती हैं। इसलिए अगर महिला अस्पताल की सीएमएस के आग्रह पर हम बाल रोग विशेषज्ञ को नहीं भेज सके। अगर हमें बदले में कोई डॉक्टर मिलता है तो एक बाल रोग विशेषज्ञ को इकाई के संचालन के लिए भेजा जा सकता है। -डॉ. बीएस यादव, कार्यवाहक सीएमएस
एसएनसीयू का एक डाक्टर से संचालित करना मुश्किल हो रहा है। सीएमओ व सीएमएस से बाल रोग विशेषज्ञ उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया है क्योंकि बच्चों के लिए तीन बाल रोग विशेषज्ञ का होना जरूरी है। -डॉ. अनीता चौरसिया, सीएमएस महिला अस्पताल