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श्रीकांत के खिलाफ नहीं पारित हो सका अविश्वास प्रस्ताव

Sat, 10 Sep 2016 12:03 AM IST
पीलीभीत, ब्यूरो
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khushi
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सहकारी गन्ना विकास समिति के चेयरमैन श्रीकांत सिंह के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव विरोधियों की तमाम कोशिशों के बावजूद पारित नहीं हो सका। अतिरिक्त मजिस्ट्रेट अरुणमणि त्रिपाठी की अध्यक्षता में अविश्वास प्रस्ताव पर हुए मतदान में चेयरमैन के विपक्ष में आठ और विपक्ष में पांच सदस्यों ने वोट दिया। विपक्ष में दो तिहाई से कम मत होने पर अविश्वास प्रस्ताव विफल घोषित कर दिया गया।
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सहकारी गन्ना विकास समिति चेयरमैन श्रीकांत सिंह के खिलाफ 13 में से नौ सदस्यों ने पिछले दिनों डीएम को अविश्वास प्रस्ताव दिया था। डीएम ने इस पर चर्चा कराकर डीसीओ को कार्रवाई के निर्देश दिए थे। डीएम के निर्देश पर नौ सितंबर को अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान की तिथि निर्धारित की गई। अतिरिक्त मजिस्ट्रेट अरुणमणि त्रिपाठी को नोडल अधिकारी नामित किया गया। शुक्रवार को नोडल अधिकारी की अध्यक्षता में ब्लाक सभागार में अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान हुआ। नोडल अधिकारी ने बताया कि चेयरमैन श्रीकांत सिंह के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित नहीं हो सका। उनके विरोध में दो तिहाई सदस्य एकमत नहीं हो सके। अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में नौ सदस्यों में से आठ मोहन सिंह, लक्ष्मीकांत भारद्वाज, हरप्रसाद, गिरधारी लाल, ढाकनलाल, सतेंद्र सिंह, उषा देवी, हरनाम सिंह ने हाथ उठाकर सहमति दी। जबकि स्वदेश सिंह यादव, चेतराम, हरदेव सिंह, सरला देवी ने अविश्वास प्रस्ताव का विरोध किया। इस मौके पर डीसीओ राजेश्वर सिंह, सहकारी गन्ना समिति के सचिव टीएन त्रिपाठी आदि मौजूद रहे। 

ढाई दशक से बगैर किसी लालच और भेदभाव के गन्ना किसानों के हक में काम कर रहा हूं। कुछ संचालक निजी लाभ लेना चाहते थे। उनका निजी स्वार्थ पूरा न होने पर अविश्वास प्रस्ताव लाने का प्रयास किया गया। विरोधियों को मुंह की खानी पड़ी है। 
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श्रीकांत सिंह, चेयरमैन गन्ना समिति पूरनपुर

एक सदस्य ने बिगाड़ दिया खेल 
अविश्वास प्रस्ताव को लेकर पहले जिन नौ सदस्यों ने डीएम को शपथ पत्र दिए थे, उनमें संचालक चेतराम भी शामिल थे। बाद में चेयरमैन ने उन्हें अपने पक्ष में कर लिया। अविश्वास प्रस्ताव की तिथि से पहले ही चेतराम ने पाला बदल लिया। विरोधियों के खेमे से टूट कर वह चेयरमैन के पक्ष में आ गए। चेतराम का मत के श्रीकांत के पक्ष में पड़ जाने के कारण ही विरोधी खेमा अविश्वास प्रस्ताव के लिए आवश्यक दो तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका। इसके चलते अविश्वास प्रस्ताव गिर गया।

एक सदस्य को गुमराह कर अविश्वास प्रस्ताव गिरा दिया गया। नियमानुसार समय पूरा होने पर फिर दोबारा अविश्वास प्रस्ताव लाया जाएगा। 
- मोहन सिंह, संचालक  

कुछ संचालकों ने धोखे से अविश्वास प्रस्ताव के लिए लेकमेरा शपथ पत्र बनवा लिया था। इसकी जानकारी होने पर मैंने विरोध किया। डीएम से मिलकर दूसरा शपथ पत्र भी दिया। मेरी आस्था शुरू से चेयरमैन में रही है। 
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चेतराम, संचालक
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