पीलीभीत। करीब एक हफ्ते से पड़ रही कड़ाके की सर्दी से जनजीवन अस्त व्यस्त है। बेघर और असहाय लोगों को ठंड में राहत दिलाने के लिए नगरपालिका की ओर से शहर में 14 स्थानों पर अलाव की व्यवस्था की गई है, मगर कागजों में, क्योंकि धरातल पर कुछ दिख नहीं रहा है। मुख्य नौगवा चौराहे पर दिनभर भीड़ बनी रहती है। बावजूद इसके बुधवार को यहां अलाव के नाम पर पड़ी राख पर कुत्ता बैठा नजर आया।
आसपास के लोगों से जानकारी करने पर पता चला कि शाम को कुछ लकड़ियां डाली जाती हैं, जो दो-तीन घंटे में ही जल जाती हैं। छतरी चौराहे पर जरूर लकड़ी पड़ी थी, मगर उनमें आग कई दिनों से बुझी होने की गवाही दे रही थी। गौहनिया चौराहे पर अलाव की जरूर व्यवस्था थी। वहीं, रोडवेज बस अड्डे पर और रेलवे स्टेशन पर सिर्फ खानापूरी दिखाई दी।
बसों की खिड़कियाें से शीशे गायब
परिवहन निगम की बसें पहले से ही खस्ताहाल हैं। सर्दी में यात्रियों को ठिठुरते हुए सफर करना पड़ रहा है। कई बसों की खिड़कियों के शीशे गायब, तो कहीं से लास्टिक नहीं होने के कारण शीशे जाम मिले। दोपहर में बरेली की ओर जा रही एक बस के परिचालक से जानकारी करने पर पता चला कि मरम्मत के नाम पर सामान नहीं मिलता। मजबूरन इसी तरह बस को चलाना पड़ा रहा है। यह स्थिति तब है, जब परिवहन निगम के अफसर लगातार बसों को बेहतर करने का दावा कर रहे हैं।
डीएम के निर्देश पर बढ़ाए गए बिस्तर
नगरपालिका की ओर से दो अस्थायी रैन बसेरा बनाए गए हैं। इनमें एक महिला और एक पुरुषों के लिए है। पिछले दिनों डीएम ने निरीक्षण कर बिस्तर बढ़ाने के निर्देश दिए थे। इस पर बिस्तरों की संख्या बढ़ा दी गई। हालांकि महिला रैनबसेरा में अभी तक कोई नहीं ठहरा। जबकि पुरुष रैन बसेरा में जरूर कई लोग ठहर चुके हैं। पुरुष रैनबसेरा के पास ही अलाव की व्यवस्था कर दी गई है।
बरेली की ओर जा रही रोडवेज बस की खिड़की की गायब शीशा। संवाद- फोटो : PILIBHIT
अस्थाई रैन बसेरा में बढ़ाए गए बिस्तर। संवाद- फोटो : PILIBHIT