जिले के 40 परिषदीय विद्यालयों में अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई तो शुरू करा दी गई, लेकिन इनमें बच्चे बेंच पर नहीं, बल्कि जमीन पर बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं। खास बात यह है कि इन मॉडल स्कूलों को न तो सरकार ने एक धेला दिया और न ही विभाग ने। इसको लेकर स्कूली बच्चे, अभिभावक व शिक्षक भी नाखुश दिखाई दे रहे हैं।
कांवेंट स्कूलों से मुकाबला करने के लिए सरकार ने नवीन शैक्षिक सत्र में परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई कराने का निर्णय लिया है। सरकार द्वारा आननफानन में यह तुगलकी आदेश तो जारी कर दिया, लेकिन कांवेंट स्कूलों जैसी सुविधा देने पर कोई तवज्जो नहीं दी गई। जिले के सात ब्लॉक समेत नगर क्षेत्र में 1230 प्राथमिक व 570 उच्च प्राथमिक स्कूल हैं। प्राथमिक विद्यालयों में से 40 का चयन अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई कराने को किया गया है। इन स्कूलों में 40 प्रधानाध्यापकों व 161 शिक्षकों का भी चयन किया गया।
जिले के सात ब्लॉक समेत नगर क्षेत्र में जिन विद्यालयों का चयन अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई के लिए किया गया है, उनमें से ज्यादातर मुख्य सड़कों के आसपास हैं। यहां तक तो स्थिति ठीक है, लेकिन इसके बाद की स्थिति इन मॉडल स्कूलों के भविष्य पर ग्रहण लगा सकती है। ऐसा इसलिए कि इन चयनित मॉडल स्कूलों में बच्चों को बैठने के बेंच नहीं बल्कि टाट पट्टी ही नसीब हो सकी है। खास बात यह है कि इन मॉडल स्कूलों के संचालन के लिए न तो सरकार ने एक धेला दिया और न ही विभाग ने। मान लिया जाए कि बच्चे जमीन पर ही बैठकर अंग्रेजी सीख लेंगे, लेकिन जब इससे संबंधित सहायक शिक्षण सामग्री ही नहीं दी गई है तो इन बच्चों का अंग्रेजी में भविष्य कैसे सुनहरा होगा, इसको लेकर अभिभावक भी असमंजस में हैं। हालांकि कुछ मॉडल स्कूलों में शिक्षकों द्वारा लर्निंग मैटेरियल व वॉल पेंटिंग कराकर उन्हें कांवेंट स्कूल का लुक दिया जा रहा है।
जिले में अंग्रेजी माध्यम के परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों के लिए कोई अतिरिक्त बजट नहीं दिया गया है। शिक्षकों की नियुक्ति की जा चुकी है। विभागीय स्तर पर व्यवस्था करने के प्रयास किए जाएंगे। कुछ शिक्षक अपने स्तर से सुविधाएं जुटा रहे हैं। यह एक सराहनीय कदम है।
- डॉ. इंद्रजीत प्रजापति, बीएसए