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नई धान खरीद नीति से तीन एजेंसियां बाहर, 45 क्रय केंद्र बंद

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पीलीभीत। नई धान क्रय नीति जारी होने के बाद जनपद में चिह्नित 150 में से 45 क्रय केंद्र बंद हो जाएंगे। तीन क्रय एजेंसियों के बाहर होने के बाद सभी स्थानों पर दूसरी एजेंसियों के सेंटर बनाने के प्रयास शुरू हो गए हैं।
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एक अक्तूबर से सरकारी धान खरीद शुरू होनी है। बीते वर्षों में धान खरीद घपले के आरोपों से घिरी रही थी। इस बार शासन के साथ ही जनपद स्तर पर डीएम पुलकित खरे भी धान खरीद पारदर्शिता के साथ कराने के लिए संजीदा हैं। डीएम पहले की बैठक में नौ एजेंसियों के 150 क्रय केेंद्र चिह्नित कर चुके हैं। सभी क्रय केंद्रों की जियो टैगिंग भी कर दी गई थी। मगर नई धान की क्रय नीति जारी होने के बाद यूपीएसएस, कर्मचारी कल्याण निगम और यूपी एग्रो को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। ऐसे में इन तीनों एजेंसियों के 45 क्रय केंद्र जनपद में कम हो गए हैं। दो नई एजेंसियों एनसीसीएफ और मंडी समिति तहसील उत्पादन के नाम से आई हैं। यह दोनों एजेंसियों ने पांच-पांच क्रय केंद्रों का प्रस्ताव रखा है। एफपीओ (फार्मर प्रोड्यूसर्स ऑरगानाइजेशन) से भी प्रस्ताव लिए गए हैं। इससे भी धान क्रय केंद्रों की संख्या बढ़ने के आसार हैं। वहीं जहां तीन एजेंसियों के बाहर जाने से जो केंद्र बंद हो गए हैं, उनकी पूर्ति करने के लिए अन्य एजेंसियों से भी संपर्क साधा जा रहा है।
9742 किसानों का अब तक पंजीकरण
बीते साल 40430 किसानों का पंजीकरण हो गया था। उसमें अधिकांश फर्जी किसान थे। इस बार प्रशासन 50 हजार किसानों के पंजीकरण का लक्ष्य रखा है। मगर अभी तक 9742 किसानों के पंजीकरण ही हो सके हैं। दो दिन से तकनीकी खामी आने की वजह से कई किसानों के पंजीकरण लॉक हो गए हैं। बताया जाता है कि शाहजहांपुर के कटरा की एक फर्म ही हर साल अपनी मर्जी के किसानों के पंजीकरण कराती है। मंडल में पिछले साल भी इस एजेंसी के नाम से बीसलपुर के एक धान खरीद माफिया ने 150 सेंटरों पर राइस मिलों के माध्यम से किसानों से औने-पौने दामों पर धान खरीदकर मोटा मुनाफा कमाया था। इस बार भी शाहजहांपुर (कटरा ) की फर्म के माध्यम से वह माफिया ही अधिक से अधिक क्रय केंद्र हथियाने की जोड़तोड़ में है।
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ऑनलाइन पंजीकरण में इस बार ओटीपी व्यवस्था
इस बार भी धान खरीद में किसानों के पंजीकरण से सवाल उठने लगे हैं। कुछ शिकायतें अधिकारियों तक पहुंची हैं कि राइस मिलर्स और बिचौलिए किसानों के खसरा खतौनी लेने के बाद खुद ही पंजीकरण करा रहे हैं। प्रशासन का दावा है कि इस बार ओटीपी सिस्टम से माफियाओं पर रोक लगेगी। किसान की मिलीभगत बिना गड़बड़ी आसान नहीं होगी। धान बेचने वाले किसान के मोबाइल पर ओटीपी आएगा, उसे अपलोड करने के बाद ही उसका पंजीकरण होगा, अन्यथा सिस्टम लॉक हो जाएगा। धान बिक्री की रकम भी सीधे किसान के खाते में ही जाएगी। अभी तक एक राइस मिल ही कई एजेंसियों के सेंटरों से संबद्ध रखी जाती थी। मगर, इस बार इसे लेकर भी नियम बनाए गए हैं। एक राइस मिल पर एक ही एजेंसी रहेगी।
बीते साल हुई थी 3.09 लाख मीट्रिक टन खरीद
शासन ने सामान्य धान का मूल्य 1868 और ग्रेड ए धान का मूल्य 1888 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किए हैं। नमी की मात्रा 17 प्रतिशत तक ही रखी है। 2018 में 3.08 लाख मीट्रिक टन, जबकि 2019 में 3.09 मीट्रिक टन धान की खरीद हुई थी।
तीन एजेंसियों के बाहर होने से 45 क्रय केंद्र बंद होंगे। दो नई एजेंसियों के अलावा एफपीओ से भी प्रस्ताव ले रहे हैं। पंजीकरण में गड़बड़ी रोकने के लिए ओटीपी की व्यवस्था है। धान क्रय केंद्र बढ़ाने का प्रयास है। पारदर्शिता से धान खरीद कराएंगे। - डॉ. अविनाश झा, डिप्टी आरएमओ
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