कलीनगर। मानव-वन्यजीव संघर्ष को लेकर संवेदनशील इलाकों को सुरक्षित रखने के लिए लंबे इंतजार के बाद जाल फेंसिंग का कार्य शुरू किया गया है। दोबारा टेंडर प्रक्रिया के बाद माला और महोफ रेंज की सीमा में कार्य शुरू कराया गया है। इससे किसानों ने राहत महसूस की है।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व की माला और महोफ रेंज के जंगल से सटे मथना जपती इलाके में पिछले एक वर्ष से बाघों की सक्रियता बढ़ी है। इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की कई घटनाएं सामने आईं हैं। सात किलोमीटर के दायरे में यह घटनाएं अधिक हुईं हैं। ग्रामीणों के आक्रोश के बाद पीटीआर प्रशासन ने जाल फेंसिंग कराने का प्रस्ताव शासन को भेजा था।
शासन स्तर से मंजूरी के साथ ही करीब सात करोड़ रुपये आवंटित किए गए। कार्य शुरू करने के लिए टेंडर आमंत्रित किए गए, लेकिन अनियमितताओं के चलते मामला कोर्ट में चला गया। लंबे इंतजार के बाद अब दोबारा टेंडर प्रक्रिया की गई। कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद कार्य शुरू कर दिया गया है।
इसमें माला और महोफ रेंज के संवेदनशील इलाकों को सुरक्षित रखने को प्राथमिकता दी गई है। जंगल सीमा पर निर्माण कार्य शुरू कराने के लिए सामग्री एकत्र की जा रही है। रेंजर सहेंद्र यादव ने बताया कि जाल फेंसिंग का कार्य काफी तेजी से किया जा रहा है।
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मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं भी रुकेंगी
जाल फेंसिंग का कार्य होने से वन्यजीवों के जंगल से बाहर निकलने के साथ मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं पर अंकुश लग सकेगा। इससे मथना, रानीगंज, लक्ष्मीपुर, जमुनिया, पुरैनी दीपनगर आदि क्षेत्र के लोगों को काफी राहत मिलेगी।
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तार फेंसिंग से मजबूत है जाल फेंसिंग
पीटीआर में वन्यजीवों की रोकथाम के लिए पूर्व के वर्षों में जंगल सीमा पर तार फेंसिंग का कार्य कराया जाता था, लेकिन स्थिति को देखते हुए अब जाल फेंसिंग लगानी शुरू की गई है। एक साल पूर्व बराही रेंज के जंगल सीमा पर जाल फेंसिंग कराई गई थी। कार्य होने के बाद इस इलाके में वन्यजीवों के जंगल से बाहर निकलने में काफी कमी आई। अब महोफ और माला रेंज के जंगल में कार्य शुरू कराया गया है। जाल फेंसिंग में ईंटों का पक्का फाउंडेशन बनाने के बाद लोहे की राड लगाकर जाल बांधा जाता है।