पीलीभीत। मानसून की बारिश के बाद शारदा नदी के जलस्तर में लगातार उतार-चढ़ाव जारी है। इससे नदी खेतों और गांवों में भी कटान करने लगी है। ऐसे में ग्रामीणों को अब भी बाढ़ का खतरा सता रहा है। सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों का कहना है कि नेपाल की तीन नदियों का पानी शारदा नदी में पहुंचकर कभी भी सीमा क्षेत्र के गांवों में स्थिति बिगाड़ सकता है।
शारदा नदी उत्तराखंड के बनबसा क्षेत्र से आगे बढ़ने के बाद नेपाल में प्रवेश करती है। नेपाल में शारदा नदी को महाकाली नदी के नाम से जाना जाता है। महाकाली में नेपाल के पहाड़ी इलाकों की कई नदियां और नाले जुड़ते हैं। उत्तर प्रदेश की सीमा में प्रवेश करते ही नेपाल की जगबूड़ा नदी का संगम भी नोमेंस लैंड पर ही होता है।
इससे शारदा नदी के पानी का प्रवाह और भी तेज हो जाता है। इतना ही नहीं अंतरराष्ट्रीय पिलर 28 के समीप नेपाल की बमनी नदी भी शारदा में आकर मिलती है। दोनों नदियों के मिलने से शारदा के जलस्तर में अक्सर उतार-चढ़ाव होने लगता है। भारी बारिश होने के बाद नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों का पानी महाकाली नदी, जगबूड़ा और बमनी नदी में एक साथ आकर गिरता है।
ऐसे में इन नदियों के रुख पर नुकसान की स्थिति टिकी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर नेपाल की नदियों के पानी का रुख भारतीय इलाकों की ओर मुड़ा तो यह भारतीय सीमा क्षेत्र के गांवों में भारी तबाही मचा सकता है। बाढ़ खंड के सहायक अभियंता ध्रुव नारायण शुक्ला ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पूर्व में ठोस कार्य करवाए गए। अब भी संवेदनशील क्षेत्रों में कार्य कराने के प्रयास जारी हैं। (संवाद)
लंबे समय से तटबंध की मांग, पर सुनवाई नहीं
महाकाली नदी में आने वाली बाढ़ से होने वाले नुकसान से बचने के लिए नेपाल की सरकार ने पिछले वर्षों में अपने क्षेत्र में मजबूत तटबंध बना लिया है। उसके बाद नेपाली क्षेत्र में महाकाली से हर साल आने वाली बाढ़ का प्रकोप कम हुआ है, मगर महाकाली बनकर भारतीय क्षेत्र में पहुंची शारदा नदी की बाढ़ से होने वाली तबाही से बचने के लिए यहां के विभागों ने ठोस उपायों पर अमल नहीं किया है। कटान के समय अस्थायी कार्यों पर ही जोर दिया जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से तटबंध बनाने की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक सुनवाई नहीं हो सकी है।
हर साल क्षतिग्रस्त हो रहीं महत्वपूर्ण बाढ़ नियंत्रण योजनाएं
ठोस कार्य न होने से पूर्व में बनीं महत्वपूर्ण बाढ़ नियंत्रण योजनाएं भी हर साल क्षतिग्रस्त हो रही हैं। इस बार भी नदी ने रमनगरा क्षेत्र में कई पत्थर के मजबूत स्परों को क्षतिग्रस्त किया। पूरनपुर के चंदिया हजारा क्षेत्र में भी करोड़ों रुपये से कराए गए कार्य को नुकसान पहुंचा है।
डीएम ने नुकसान की वजह जानने के लिए पूर्व में बनाई थी कमेटी
जुलाई माह में आई बाढ़ के बाद डीएम संजय कुमार सिंह ने कमेटी का गठन कर शारदा और उसमें मिलने वाली नदियों की जानकारी कर नुकसान की वजह तलाशने के साथ बचाव के तरीकों की पड़ताल करने के निर्देश दिए थे। एसडीएम कलीनगर समेत तीन अफसरों को कमेटी में शामिल किया गया था। जिन्होंने शारदा से होने वाले नुकसान की वजह तलाशनी शुरू की, लेकिन अब तक वे किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सके।