पीलीभीत। बरेली सितारगंज हाईवे के निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया रिकॉर्ड न आने की वजह से और लंबी खींच गई है। भूमि अधिग्रहण संबंधी दस्तावेज जांच के लिए बरेली भेजे गए थे। एक माह का समय होने को है, अब तक रिकॉर्ड बरेली से वापस नहीं आया है। ऐसे में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अधर में लटक गई है।
बरेली सितारगंज हाईवे के लिए अब तक भूमि अधिग्रहण सिर्फ 62 प्रतिशत ही हो पाया है। जबकि इसका 80 प्रतिशत होना अनिवार्य है। अधिकारियों के अनुसार अधिग्रहण की प्रक्रिया को 15 अक्तूबर तक पूरा किया जाना है। अधिग्रहण की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाता इससे पहले ही मुआवजा वितरण में घपलेबाजी सामने आ गई।
इसकी वजह से भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को रोक दिया गया। साथ ही अधिगृहीत की गई भूमि में घपलेबाजों का पता लगाने के लिए जांच बैठा दी गई। जांच पूरी करने के लिए पहले तो पीलीभीत से भूमि अध्याप्ति अधिकारी और अधिग्रहण का पूरा रिकॉर्ड बरेली मंगा लिया गया था। बाद में एसएएलओ तो वापस आए, लेकिन रिकॉर्ड नहीं भेजा गया।
बाद में एसएएलओ के पूरे स्टाफ को भी बरेली में रिकॉर्ड की निगरानी के लिए बुला लिया गया। एक माह का समय बीतने को है, अधिग्रहण संबंधी रिकॉर्ड और स्टाफ पीलीभीत नहीं आया है। इसकी वजह से अधिग्रहण की प्रक्रिया को 15 अक्तूबर तक पूरा कर पाना चुनौती का विषय बना हुआ है। वहीं, जिन किसानों को मुआवजा नहीं मिल पाया था रिकॉर्ड न होने के वजह से उनको भी अब इंतजार करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
बरेली में रिकॉर्ड और स्टाफ मांगा गया था। अब तक रिकॉर्ड और स्टाफ दोनों ही वापस नहीं आए हैं। ऐसे में आगे की प्रक्रिया अभी शुरू नहीं की गई है। घपलेबाजी की जांच चल रहा है। जांच पूरी होते ही रिकॉर्ड आ जाएगा। इसके बाद आगे की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
- विजयवर्धन तोमर, विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी
अब तक मंडलायुक्त की ओर से तत्कालीन अधिकारियों के नाम नहीं मांगे गए हैं। सारा कुछ रिकॉर्ड में है और रिकॉर्ड बरेली में है। जैसे ही मांगे जाएंगे। नामों की सूची उपलब्ध करा दी जाएगी।
-संजय कुमार सिंह, जिलाधिकारी