नेपाली हाथी के रौंदी धान की फसल। स्रोत ग्रामीण
पीलीभीत। कहते हैं जानवरों में भी भावनाएं होती हैं और शायद यही वजह है कि अपने झुंड से बिछड़ा नेपाली हाथी अब पीलीभीत टाइगर रिजर्व के हाथियों को अपना परिवार मान बैठा है। माला गेस्ट हाउस में डटा यह हाथी वहां के चार पालतू हाथियों से इतना जुड़ गया है कि गेस्ट हाउस छोड़ने को तैयार नहीं। उसका यह लगाव अब प्रशासन के लिए परेशानी का सबब बन गया है, क्योंकि रात के समय वह जाल फेसिंग तोड़ देता है और आसपास के खेतों में फसलों को रौंद देता है।
जनपद पीलीभीत के जंगलों से नेपाली हाथियों का जुड़ाव दशकों पुराना है। नेपाल की शुक्ल फांटा सेंचुरी से निकलकर अक्सर नेपाली हाथियों का झुंड पीलीभीत टाइगर रिजर्व की बराही और हरीपुर रेंज के जंगल में पहुंच जाता है। कई दिनों तक रुकने के बाद लौटने का सिलसिला भी बना रहता है, लेकिन करीब तीन माह पहले माला रेंज में नेपाली हाथियों का एक झुंड आया था। उसी दौरान एक हाथी अपने समूह से बिछड़ गया। अकेलेपन के बीच उसने पीटीआर के हाथियों का साथ पा लिया। दिनभर गेस्ट हाउस परिसर में मंडराता यह हाथी रात को कभी जाल फेंसिंग को क्षतिग्रस्त करता है तो कभी किसानों के खेतों में पहुंचकर नुकसान पहुंचा देता है। स्थानीय किसानों का कहना है कि रात के अंधेरे में जब यह हाथी खेतों में घुसता है, तो उनकी मेहनत की कमाई पर खतरा मंडराने लगता है। वहीं, पीटीआर प्रशासन के लिए भी यह स्थिति चुनौती बन गई है। अधिकारियों का कहना है कि हाथी को उसके झुंड तक वापस पहुंचाने या वैकल्पिक उपाय तलाशने की कोशिश की जा रही है। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि हाथी अत्यधिक सामाजिक जीव होते हैं। जब वे अपने दल से अलग हो जाते हैं, तो नए साथियों को अपना लेते हैं। शायद यही वजह है कि नेपाली हाथी को अब पीटीआर के हाथियों में परिवार का साया दिख रहा है।