पीलीभीत। चुनाव आते ही नेताओं का वोट मांगने का सिलसिला शुरू हो जाता है। विकास के नाम पर वोट भले ही सबके लिए जाएं, मगर धरातल पर केवल खास के लिए ही विकास किया जा रहा है। ढाई साल के बाद भी शहर के तमाम इलाके ऐसे हैं, जहां विकास ही नहीं दिखता। बजट न होने का रोना रोने वाली नगरपालिका नेताओं और अफसरों के करीबियों के इलाकों में विकास करने से पीछे नही हटती। शहर की सड़कें खराब हैं। उन पर काम हो या न हो। मगर उनके यहां दुबारा सुधार करने से भी पीछे नहीं हटते है, लेकिन शहर के आम इलाकों में लगे गंदगी के ढेर और टूटी सड़कें सुधारने के लिए नगरपालिका गौर नहीं कर कर रही है।
शहर में लगभग ढाई लाख की आबादी है। नगरपालिका में चुनाव चेयरमैन का हो या फिर सभासद का। जनता के वोट के लिए सबके विकास के एजेंडे को सबसे आगे रखते है, लेकिन चुनाव जीतने के बाद गली मोहल्लों और मेन सड़कों को सुधारने के लिए कोई काम नहीं करते हैं। नगरपालिका दावा करती है, उनके द्वारा शहर में विकास खूब कराया गया। सोमवार को अमर उजाला की टीम ने शहर के विकास का जायजा लिया तो पता चला कि शहर की वीआईपी समझी जाने वाली आफीसर कॉलोनी, अशोक कॉलोनी, बल्लभनगर समेत खास इलाकों में ही किया गया। यह वह इलाके हैं, जिनमें नेताओं समेत कुछ खास लोग रहते हैं।
आम इलाके विकास से अछूते
नगरपालिका ने उन इलाकों में विकास न के बराबर कराए, जिनमें आम लोग रहते थे। शहर के मोहल्ला खकरा, डालचंद्र, बेनी चौधरी, चरक का कुंआ, आसफजान, फीलखाना, पंजाबियान, आयुर्वेदिक कॉलेज, नखासा और बागगुलशेर खां समेत कई मोहल्लों में विकास के नाम पर वहां टूटी सड़कें, गंदगी से चोक नाले नालियां हैं। इन इलाकों में गंदगी की वजह से पनपते हैं। यह मोहल्लेवासियों के लिए मुसीबत हैं। इनसे संक्रामक बीमारी फैल सकती है, मगर, नगरपालिका के लिए इन इलाकों में सफाई कराने से लेकर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना तो दूर, वहां का स्टाफ यहां झांककर भी नहीं देखता क्योंकि इन मोहल्लों में आम नागरिक रहते हैं।
टनकपुर हाईवे पर कलक्ट्रेट के पीछे से ही आफीसर कॉलोनी है। वहां एडीएम से लेकर जिला स्तरीय अधिकारियों के आवास हैं। यह कॉलोनी वार्ड नंबर 5 में आती है। यहां की सड़कें सुबह से लेकर शाम तक चमचमाती हैं। नगरपालिका सफाई से लेकर हर चीज का ख्याल रखती है।
शहर के संजय रॉयल पार्क कॉलोनी वार्ड नंबर 7 में आती है। इस कॉलोनी में शहर विधायक समेत कई बड़े लोगों के मकान हैं। वार्ड का एरिया काफी बड़ा है। भले ही चेयरमैन और विधायक में लाख अनबन हो, लेकिन सफाई की दृष्टि से यह कॉलोनी एकदम चमकती हुई दिखती है।
शहर के मोहल्ला बागगुलशेर खां जो वार्ड नंबर 25 में आता है। यहां विकास के नाम पर कोई भी काम नही कराया गया है। दूधिया मंदिर से रोडवेज की ओर जाने वाली गली में सड़क पर ही गोबर और गंदगी का ढेर लग रहता है। गंदगी की वजह से इस गली से राहगीरों का निकलना दूभर है।
वार्ड नंबर एक के मोहल्ला नखासा जो मलिन बस्ती में आता है। यहां नाले गंदगी और कूड़े से पटे पड़े हैं। मकानों के पीछे गंदगी के ढेर लगे हैं। नगरपालिका कर्मचारी मोहल्ले में रोजाना सफाई करना भी जरूरी नहीं समझते। बस्ती के लोग अक्सर कहते हैं कि उनकी कॉलोनी वीआईपी तो नहीं, जो नगरपालिका रोज सफाई कराए