संस्कार भारती के तत्वावधान में गीत गजल संध्या और सारस्वत अभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया। इसमें दिवंगत साहित्यकार आचार्य सुदर्शन मिश्र स्मृति साहित्यकार बरेली से आए कवि राजीव अग्रवाल, देवदत्त प्रसून स्मृति सम्मान पूरनपुर के देव शर्मा विचित्र, डॉ. सुदीप कुमार अवस्थी स्मृति सम्मान पूरनपुर के अमिताभ मिश्र, जफर पीलीभीत स्मृति सम्मान तिलहर के साजिद सफदर, सुरूर जहानाबादी स्मृति सम्मन दातागंज बदायूं के मुकेश कमल, विजय वाजपेई स्मृति बरेल के रोहित राकेश, डॉ. शकुन अग्रवाल स्मृति सम्मान बरेली की नगमा बरेलवी व मनुज स्मृति सम्मान बरेली के रचित दीक्षित को दिया गया। इससे पूर्व गीत संध्या का शुभारंभ संजीव मिश्रा ने सरस्वती वंदना से किया। बरेली के रंजन विशद ने काव्यपाठ किया-
किसी पे तन्ज करूं ऐसा तो व्यवहार नहीं,
गुरुर हो किसी में भी मुझे स्वीकार नहीं।
साजिद सफदर ने कहा-
खुद्दार हो तो खुद को बेकार मत करो,
झूठी अगर हो बात तो स्वीकार मत करो।
देवशर्मा विचित्र की रचना पर खूब तालियां मिलीं-
शिकायत और होती है गिला कुछ और होता है,
वफ और बेवफाई का सिला कुछ और होता है।
जवानी के तजुर्बे तो तुम्हें भी हैं हमें भी हैं,
बुढापे में मोहब्बत का मजा कुछ और होता है।
अमिताभ मिश्र ने कहा-
मैं जल जाऊगंा बन के परवाना लेकिन,
तुम्हें शमां बनके पिघलना पडेगा।
जीतेश राज नक्श ने कहा-
जब से सूरज को सर पर रखा है,
खुद में कितना सिमट गया हूं मैं।
बरेली की नगमा ने रचना पढ़ी-
रस्म उल्फत की हमें ऐसा निभाना चाहिए,
सामने जब आप हों तो मुस्कुराना चाहिए।
रोहित राकेश ने कहा-
सच के मुुह पर क्यों है ताला पता चले,
कौन है भोला कौन है भाला पता चले।
राजीव अग्रवल ने कहा-
पत्थर पर हाथ मारिए रास्ता बन जाएगा,
सच्चा होगा प्यार तो एक रोज मिल जाएगा।
मुकेश कमल ने कहा।
आंचल में मैंने जिसके हर जन्म को जिया,
मेरे लबों ने सिर्फ मां का नाम ही लिया।
राजीव अग्रवाल की अध्यक्षता में हुए कार्यक्रम में डॉ. एचआर गोखले मुख्य अतिथि व चेयरमैन प्रभात जायसवाल विशिष्ट अतिथि रहे। इस मौके पर रमेश चंद्र त्रिवेदी पुष्प, अरुण भारद्वाज, डॉ. प्रणव शास्त्री, अमिताभ अग्निहोत्री, इरफान सागर, मुजीव साहिल, फुरकान हाशमी, दीप्तिमान मिश्रा, एचके रस्तोगी, देवेंद्र गोस्वामी, ममता देवल, अल्पना सक्सेना, पीएस खरे, रामकिशोर शर्मा, डॉ. देशबंधु मिश्रा, प्रदीप अंकुर, डॉ. सचिन सक्सेना सहित कई लोग मौजूद रहे।