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खुदाई में निकली भगवान वराह की प्राचीन मूर्ति और शिलालेख गायब होने की आशंका

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पीलीभीत। बीसलपुर के गांव इलाबांस देवल में राज्य पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की खुदाई में निकली खजुराहो काल की भगवान वराह की प्राचीन मूर्तियां और शिलालेख गायब होने का खतरा बना हुआ है। छह महीने पहले विभाग की टीम ने टीले की खुदाई कर 10 वीं शताब्दी की ये मूर्तियां और शिलालेख पाए थे। मगर टीम लावारिस हालत में छोड़कर चली गई। इसी वजह से समुद्र मंथन की एक प्राचीन मूर्ति पहले गायब भी हो चुकी है, जिसकी एफआईआर दियोरिया थाने में दर्ज है। हालांकि विभागीय टीम के अफसर शासन को पत्र लिखकर प्राचीन मूर्तियां और शिलालेेेेखों को म्यूजियम या सुरक्षित जगह पर रखवाने को कह चुके हैं, मगर अब तक इस संबंध में न तो शासन से कोई कदम उठाया गया, न ही स्थानीय प्रशासन की ओर से।
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आगरा से आई पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की टीम ने टीले के अंदर जमीन की खुदाई की तो उसमें देवी-देवताओं की 10 वीं शताब्दी की 25 से अधिक प्राचीन मूर्तियां और शिलालेख निकले थे। इन पर लिखी लिपि का अध्ययन किया गया, जो आसानी से किसी की समझ में नहीं आई। बाद में पता चला कि इस लिपि का अनुवाद अमेरिका के पुरातत्व विद और इतिहासकार एचएस बुल्डर्सन ने भी अपनी किताब में किया है। यह 1829 में भारत भ्रमण के दौरान बीसलपुर के गांव इलाबांस देवल आए थे। रुहेलखंड विश्वविद्यालय की इतिहास एवं संस्कृति विभाग की टीम ने भी हाल ही में इस पर शोध शुरू किया है। इसमें भी इलाबांस देवल की जमीन की खुदाई में निकलेे शिलालेख और मूर्तियों के 10 वीं शताब्दी के होने की पुष्टि की गई।
रुहेलखंड विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के एक प्रवक्ता के अनुसार प्राचीन मूर्तियों और शिलालेखों पर अंकित लिपि से उस काल का पता चलता है, जब ये मूर्तियां बनाई गई होंगी। इलाबांस देवल लोधी-राजपूतों की आस्था का बड़ा केंद्र था। राजपूत राजाओं ने 10 वीं शताब्दी में इलाबांस के जंगलों मे भगवान शिव और माता पार्वती के दो विशाल मंदिरों का निर्माण कराया था। एक किलोमीटर से अधिक क्षेत्रफल में फैले मंदिर में उस समय 52 टीले थे। अब इसमें केवल एक ही टीला बचा रह गया है। इसी टीले की खुदाई राज्य पुरातत्व सर्वेेक्षण विभाग की टीम ने छह महीने पहले की थी।
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खुदाई में देवताओं के समुद्र मंथन वाली प्राचीन मूर्ति भी निकली थी। कुछ दिनों बाद यह मूर्ति चोरी हो गई, जिसकी एफआईआर दियोरिया थाने में दर्ज है। पुरातत्व विभाग की खुदाई में भगवान विष्णु के वराह अवतार की मूर्ति समेत 10 वीं शताब्दी के कुछ अन्य प्राचीन शिलालेख भी निकले थे। मगर, ये सब कई माह से अब भी लावारिस पड़े हुए हैं। पुरातत्व सर्वेक्षण की राज्य इकाई के पास प्राचीन मूर्तियों और शिलालेख की सुरक्षा के लिए कोई इतंजाम नहीं है, वह केंद्रीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग से ही इसके लिए गुजारिश करती है। या फिर पुलिस-प्रशासन पर निर्भर रहती है। इस बीच गांव वालों ने आशंका जताई है कि प्राचीन मूर्तियां या शिलालेख कभी भी चोरी हो सकते हैं। सामाजिक कार्यकर्ता शिवम कश्यप ने राज्य पुरातत्व विभाग को पत्र लिखकर खुुदाई में मिली प्राचीन मूर्तियां और शिलालेख जैसी एतिहासिक धरोहरें चोरी होने की आशंका जताते हुए इनको किसी म्यूजियम में या सुरक्षित जगह पर रखवाने की मांग की।
इलाबांस देवल के प्राचीन मंदिर को पुरातत्व की दृष्टि से एतिहासिक स्थल घोषित करने के लिए केंद्रीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को पत्र लिखा था। अभी यह एतिहासिक स्थल घोषित नहीं हो पाया है। खुदाई में निकली मूर्तियां सुरक्षित रखवाने के लिए मेरी ओर से शासन को पत्र लिखा गया है। -पीके सिंह, निदेशक, राज्य पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग, लखनऊ
इलाबांस देवल की प्राचीन मूर्तियों को संरक्षित रखने के बारे में शासन का पत्र नहीं आया है। फिर भी प्रशासन की ओर से प्राचीन मूर्तियों और धरोहरों को सुरक्षित रखने के लिए कदम उठाए जाएंगे। -वैभव श्रीवास्तव, डीएम
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