उन्होंने कहा कि अब सभी नौकरियां संविदा की हो गई हैं। संविदा की नौकरी इसलिए हैं कि जब चाहे रख लें और जब चाहें निकाल दें। संविदा में न तो बीमा है और ही कोई अन्य सुविधा। नौकरी न देने से सरकार का एक लाख करोड़ रुपये बच रहा है, जिससे आटा, दाल, चना दिया जा रहा है। यही पैसा चुनाव में खर्च किया जाता है।