प्रशासन द्वारा शहर के मुख्य मार्ग पर लगे होर्डिंग्स हटाने का पक्षपात
पूर्ण अभियान दूसरे दिन भी चला। सड़क किनारे लगे कई बोर्डों को छूने तक की
हिम्मत प्रशासन नहीं दिखा वहीं कुछ को नेस्तानबूत कर दिया। केंद्रीय मंत्री
के संसदीय कार्यालय के बोर्ड को हटाने के लिए दो बार प्रयास हुआ लेकिन एक
फोन कॉल पर बिना बोर्ड हटाए ही पालिका की टीम वहीं से चली गई।
नगरपालिका
ने सिटी मजिस्ट्रेट के नेतृत्व में बुधवार को नौगवां चौराहे से होर्डिग्स
अभियान शुरू किया था। इसका उद्देश्य यातायात को बाधित कर रहे होर्डिग्स,
बैनर, साइन बोर्ड आदि हटाना था लेकिन पहले दिन ही कई लोगों के बोर्ड उखाड़
दिए गए। इसमें सबसे ज्यादा दिक्कत नगरपालिका से होर्डिंग लगाने का ठेका
लेने वालों को हुई। लाखों रुपये का राजस्व जमा होने के बाद भी उनके
होर्डिंग्स, फ्लैक्सी आदि उखाड़ दी गई।
दूसरे दिन बृहस्पतिवार का अभियान और
भी पक्षपात पूर्ण रहा। पालिका कर्मियों ने जेसीबी के माध्यम से केवल खंभों
पर लगे बैनर पोस्टर हटाए। इसके अलावा हाइवे किनारे लगे कुछ ऐसे लोगों के
बोर्ड उखाड़ दिए जिनकी कोई पहुंच नहीं थी जबकि पहुंच वालों के बोर्ड छूने
तक की हिम्मत नहीं हुई। दूसरी ओर गलत जगह लगे कई सरकारी बोर्डों को भी नहीं
छुआ गया। प्रशासन की सबसे ज्यादा किरकिरी केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी के
संसदीय कार्यालय का हाइवे किनारे लगे बोर्ड को लेकर हुई। पहले ईओ टीम के
साथ यहां पहुंचे लेकिन हिम्मत नहीं कर सके।
इसके करीब एक घंटे बाद सिटी
मजिस्टे्रट पुन: टीम लेकर मौके पर पहुंचे। जेसीबी चालक ने बोर्ड तोडने को
मशीन भी मौके पर लगा दी। लेकिन इस बीच आए फोन के बाद टीम बिना कोई कार्रवाई
करें न केवल वहां से हट गई बल्कि अभियान ही बंद कर दिया।
सिटी
मजिस्ट्रेट जितेंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि बृहस्पतिवार के अभियान के समय
वह मौजूद नहीं थे। जानकारी होने पर मैंने स्वयं काम बंद करा दिया।
केंद्रीय मंत्री के कार्यालय के बोर्ड को हटाने के लिए उनके प्रतिनिधियों
से कह दिया गया है। यदि बोर्ड नहीं हटता हो उसे भी हटाया जाएगा।