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Pilibhit News: मां का त्याग, गुजरात में मजदूरी कर बेटे को बनाया असिस्टेंट प्रोफेसर

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माँ आमना बेगम के साथ असिस्टेंट प्रोफेसर बने मोहम्मद तारिक। - फोटो : Archive
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न्यूरिया। मां सिर्फ जन्म ही नहीं देती, बल्कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में अपने बच्चों के सपनों को भी पूरा करने के लिए कोई भी जोखिम उठाने के लिए तैयार रहती है। कस्बे के मोहल्ला अब्दुल रहीम की आमना बेगम के संघर्ष की कहानी मां के त्याग और हौसले की मिसाल बनकर समाज के सामने आई है। पति की मौत के बाद आर्थिक संकट से जूझते हुए भी उन्होंने हार नहीं मानी। गुजरात जाकर मजदूरी की और अपने बेटे मोहम्मद तारिक की पढ़ाई के लिए खर्च जुटाया। हालात से संघर्ष करते हुए बेटे के असिस्टेंट प्रोफेसर बनने का उसका सपना साकार किया।
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आमना बेगम के पति सगीर अहमद मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते थे, लेकिन वर्ष 2015 में अचानक वह बीमार हुए और उनका इंतकाल हो गया। इसके बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। घर की जिम्मेदारी आमना बेगम के कंधों पर आ गई। सीमित साधनों और आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने बेटे की पढ़ाई नहीं रुकने दी। बड़े बेटे मोहम्मद रिजवान के साथ गुजरात जाकर मजदूरी की। मजदूरी के कुछ पैसों से गुजर बसर करते हुए छोटे बेटे तारिक की पढ़ाई के लिए बचत कर धनराशि भेजती रहीं। इससे तारिक की शिक्षा जारी रही। कस्बे के राजकीय इंटर कॉलेज में पढ़ने वाले बेटे की नियमित फीस भरती रहीं। इंटर के बाद आगे की पढ़ाई के लिए उसे अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में दाखिला दिलवाया। तारिक वर्तमान में महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय से पीएचडी कर रहा है। पढ़ाई के साथ ही वह बेटे को प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने के लिए हौसला देती रहीं। आखिरकार आमना बेगम का संघर्ष रंग लाया और हाल में ही तारिक का चयन हरियाणा लोक सेवा आयोग की ओर से आयोजित परीक्षा और साक्षात्कार के बाद असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर हो गया।
मोहम्मद तारिक अपनी सफलता का सबसे बड़ा श्रेय अपनी मां आमना बेगम को देते हैं। मोहल्ले के लोग आमना बेगम के बारे में कहते हैं कि उन्होंने खुद तमाम तरह की तकलीफ उठाई, लेकिन तारिक को कभी कोई कमी महसूस नहीं होने दी। तारिक भी कहते हैं कि अम्मी के त्याग, संघर्ष और विश्वास से ही वह कामयाबी के इस मुकाम तक पहुंचे हैं। संवाद
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