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मनरेगा घोटालाः फर्म बनाने वाले दो तकनीकी सहायक और रोजगार सेवक की सेवाएं समाप्त

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बीडीओ पूरनपुर और डीसी मनरेगा को भी नोटिस भेजकर मांगा जवाब
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डीएम के निर्देश पर सीडीओ ने की कार्रवाई, अभी और बढ़ेगी मुश्किल
पीलीभीत। मनरेगा में फर्म बनाकर घोटाला करने वाले जिम्मेदारों पर आखिरकार कार्रवाई हो ही गई। डीएम के निर्देश पर सीडीओ ने दो तकनीकी सहायक और एक रोजगार सेवक की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। इसका आदेश भी जारी कर दिया गया है। वहीं पूरे मामले में अब तक लापरवाही बरतने पर पूरनपुर बीडीओ और डीसी मनरेगा को भी नोटिस भेजकर जवाब तलब किया गया है।
शासन स्तर पर हुई शिकायत के बाद अमरिया के एपीओ अजय कुमार और तीन रोजगार सेवकों को बर्खास्त कर 27 अगस्त को जेल भेजा गया था। इन पर निजी फर्म और फर्जी मस्टररोल बनाकर मनरेगा में करोड़ों का घोटाला करने का आरोप था। सीडीओ द्वारा की गई जांच में 3.62 करोड़ रुपये के फर्म से लेनदेन के साक्ष्य भी जुटाए गए थे। इस बड़े घोटाले के उजागर होने पर कई अन्य जिम्मेदारों के भी फर्म बनाकर घोटाला करने का शक गहराया था।
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डीएम पुलकित खरे ने इसका संज्ञान लिया और जांच शुरू कराई थी। डीडीओ योगेंद्र कुमार पाठक ने जांच की तो पूरनपुर क्षेत्र से एक और बड़ा मामला पकड़ में आया। माधोटांडा का रोजगार सेवक इस्लामुद्दीन खां, पूरनपुुर के तकनीकी सहायक राजीव भारती, भगवान सिंह भी एपीओ की तरह फर्म बनाकर मनरेगा में खेल करते पाए गए थे। डीडीओ ने जांच करके रिपोर्ट सीडीओ को दी। सीडीओ ने इसे अवलोकन के बाद डीडीओ को भेज दिया था। डीएम ने कार्रवाई की संस्तुति करते हुए आदेशित कर दिया था। इसके बाद मामला फिर दबा दिया गया था।
बीते दिनों तकनीकी सहायक और रोजगार सेवक की फर्मों को काली सूची में डाल दिया गया था। अब कार्रवाई को आगे बढ़ाया गया है। डीएम से संस्तुति लेने के बाद रोजगार सेवक और दोनों तकनीकी सहायकों की सेवा समाप्त कर दी गई हैं। इसका आदेश भी सीडीओ के द्वारा जारी कर दिया गया है। फर्म बनाकर तकनीकी सहायक और रोजगार सेवक के काम करने की बात उजागर होने पर पूरनपुर बीडीओ और डीसी मनरेगा को भी नोटिस भेजा गया है। उनका जवाब मिलने के बाद आगे कार्रवाई की जाएगी। उनकी भी मुश्किल अभी और बढ़ सकती है। अगर जवाब संतोषजनक नहीं हुआ तो शासन स्तर पर पत्राचार कर कार्रवाई कराई जाएगी। तीनों पर हुई कार्रवाई के बाद खलबली मची है।
एफआईआर के आदेश तो कर दिए, मगर अब तक नहीं दी गई है तहरीर
रोजगार सेवक और तकनीकी सहायक की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। इसी के साथ सीडीओ और डीडीओ दोनों की ओर से तीनों घोटालेबाजों पर एफआईआर के भी आदेश किए जा चुके हैं। इसका लिखित आदेश बनाकर जिला मुख्यालय से बीडीओ पूरनपुर को भेजा जा चुका है। मगर अब तक इस पर कोई सुध नहीं ली गई है। ऐसा नहीं कि बीडीओ पूरनपुर को इसकी कोई भनक न हो या फिर उन तक आदेश न पहुंचा हो। उनकी तरफ से अधिकारियों को पत्राचार किया गया है, जिसमें साफ कहा गया है कि एफआईआर को लेकर दिए गए निर्देशों का पालन कराया जाएगा। मगर इस संबंध में अब तक कोई तहरीर पुलिस को नहीं दी गई है। इससे कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। कहीं न कहीं मामले को दबाने की कोशिश चल रही है। डीडीओ के द्वारा जांच पूरी करने के बाद से ही एफआईआर में राहत देने की चर्चा तेज हो गई थी। फिलहाल डीएम के सख्त रुख के चलते मामला दबाना आसान नहीं होगा।
संरक्षण देने वालों के चक्कर लगा रहे घोटालेबाज
सेवाएं समाप्ति के बाद एफआईआर को लेकर शिकंजा कसने की भनक रोजगार सेवक और तीनों तकनीकी सहायकों को भी है। ऐसे में वह खुद को बचाने की जुगत में लगे हुए हैं। लंबे समय से मनरेगा में फर्म बनाकर काम करने के दौरान कई अफसरों से करीबी हो चुकी थी। कुछ राजनेताओं के भी वह संपर्क में हैं। चर्चा है कि एफआईआर से बचने के लिए और कार्रवाई दबाने के लिए उनकी तरफ से भी जद्दोजहद चल रही है। वह बचाव के लिए अब तक संरक्षण देते हुए कुछ अफसरों और नेताओं की भी शरण में पहुंच रहे हैं।
निजी फर्म बनाकर मनरेगा में काम करने वाले दो तकनीकी सहायक और एक रोजगार सेवक की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। उनकी फर्मों को काली सूची में डाला गया है। बीडीओ पूरनपुर और डीसी मनरेगा को भी नोटिस देकर जवाब मांगा है। एफआईआर कराने के लिए लिखित आदेश बीडीओ पूरनपुर को दिए जा चुके हैं। - श्रीनिवास मिश्र, सीडीओ
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मनरेगा में फर्म बनाने वाले रोजगार सेवक और तकनीकी सहायक पर रिपोर्ट दर्ज कराने के निर्देश दिए जा चुके हैं। अभी तक एफआईआर क्यों नहीं कराई गई। इसकी जानकारी कराएंगे। जल्द एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी। गड़बड़ी करने वालों को कोई रियायत नहीं मिलेगी। - पुलकित खरे, डीएम
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