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विधायक की शिकायत पर शासन ने अवैध खनन मामले में अफसरों से लिया फीडबैक

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पीलीभीत। बीसलपुर विधायक की शिकायत पर शासन तक पहुंचने के बाद अवैध खनन का मामला अभी भी सुर्खियों में है। शासन ने विधायक की शिकायतों के तीन बिंदुओं की जांच मंडलायुक्त बरेली को सौंपी है। वहीं खनन संबंधी दो मामलों की जांच विभागीय निदेशक को दी गई है। शासन ने इस मामले में एक प्रशासनिक अफसर से बीसलपुर के ढुकसी समेत विभिन्न स्थानों पर हुए अवैध खनन मामले का फीडबैक लिया है।
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जनपद में अवैध खनन का मामला लगातार सुर्खियों में है। अमर उजाला ने जनवरी में ग्रामीणों द्वारा उठाई गई समस्या के बाद अवैध खनन निकासी को अभियान के तौर पर लेकर उसे प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इस पर बीसलपुर विधायक रामसरन वर्मा ने 23 जनवरी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर शिकायत की थी। मामला मुख्यमंत्री दरबार में पहुंचते ही पूरा प्रशासनिक अमला हरकत में आ गया। इसके चलते प्रशासन ने हाल ही में ताबड़तोड़ कार्रवाई कर शाहजहांपुर के भाजपा नेता डीपीएस राठौर समेत तीन खनन पट्टेदारों पर एफआईआर दर्ज कराई। इनमें भाजपा नेता डीपीएस राठौर पर 87 लाख और दूसरे पट्टेदार अनिल अग्रवाल पर 1.33 करोड़ का जुर्माना भी लगाया। दोनों पर 2.20 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया। उधर, खनन मामले में शासन भी सख्त दिखाई दे रहा है। शासन ने एक स्थानीय अफसर से पूरे जनपद में होने वाली अवैध खनन मामले में पूरी जानकारी ली। हालांकि इसमें वह अफसर शामिल नहीं थे, जिनके पास खनन का प्रभार था। दूसरे अफसरों से खनन की जानकारी लिए जाने से प्रशासनिक अमले में हड़कंप है।
शासन के हस्तक्षेप के बाद अवैध खनन का मामला ठंडा होता दिखाई नहीं दे रहा है। शासन ने इस मामले में पांच कमेटियों का गठन कर जांच करने के निर्देश दिए हैं। इसमें दो कमेटियां शासन स्तर पर बनी हैं और तीन मामलों की जांच मंडलायुक्त करा रहे हैं। जांच में स्टांप शुल्क घोटाला, खनन निकासी, स्वेटर वितरण, धान खरीद घोटाला और डूडा के काम शामिल हैं।
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पैमाइश न करने की पट्टेदार ने शासन में की शिकायत
पीलीभीत। ग्राम समाज की भूमि पर अवैध खनन करने के मामले में हुई कार्रवाई के बाद खनन पट्टेदार अनिल अग्रवाल ने खनन निदेशक को पत्र भेजकर जिला प्रशासन पर एकतरफा कार्रवाई करने का आरोप लगाया है। खनन निदेशक को भेजी शिकायत में कहा गया कि प्रशासन द्वारा निर्धारित पट्टे के रकबे से उनको कम जमीन दी गई। आरोप लगाया है कि उपलब्ध जमीन के डेढ़ हेक्टेयर में बालू ही नहीं थी। जब इस मामले में आवंटित पट्टे की पैमाइश कराने की मांग की गई तो उसके लिए टीम भी गठित हुई, मगर तीन माह बीतने के बाद भी पैमाइश नहीं हुई। अब उन पर एकतरफा कार्रवाई कर दी गई। खनन पट्टेदार ने मुख्यालय स्तर से जांच कराने और जांच न कराने की दशा में खनन पट्टे के मद में जमा की गई धनराशि दिलाने की मांग की।
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