पूरनपुर। मंडलायुक्त रणवीर प्रसाद ने कहा कि केवल विस्थापित परिवारों को ही जमीन पर मालिकाना हक मिलेगा। जो लोग यहां व्यापार करने के उद्देश्य से आए हैं, उन्हें मालिकाना हक नहीं दिया जाएगा। आयुक्त ने गांव चंदिया हजारा पहुंचकर ग्रामीणों से बातचीत के दौरान यह बात स्पष्ट की। उन्होंने तहसील सभागार में बुलाए गए विस्थापितों से भी मिलकर उनकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान उन्होंने कहा कि हक मिलने में कोई परेशानी न आए, इसलिए पहले सर्वे कराया जा रहा है।
चंदिया हजारा के प्राथमिक स्कूल में विस्थापितों के साथ हुई बैठक में मंडलायुक्त रणवीर प्रसाद ने कहा कि पश्चिम बंगाल सहित अन्य स्थानों के विस्थापित राजस्व और वन विभाग की जमीन पर बसे हैं। उनके भविष्य के बारे में तय किया जाना है कि वैधानिक रूप से उन्हें जमीन पर मालिकाना हक दिलाया जाए। शासन ने इसके लिए कमेटी का गठन किया है। उनके अभिलेखों का सत्यापन कराया जा रहा है। कुछ विस्थापित ऐसी जमीन पर अपना दावा कर रहे हैं, जो दूसरे सरकारी विभागों की है। सत्यापन में यह लोग अपना रिकॉर्ड दिखाएं।
चंदिया हजारा की प्रधान के पति परमजीत सिंह पम्मा ने बताया कि पंचायत में बाहर से आए 321 परिवारों को तीन-तीन एकड़, 115 परिवारों को ढाई-ढाई एकड़ जमीन दी गई है। मगर अब तक जमीन पर मालिकाना हक उन्हें नहीं मिल पाया है। इससे विस्थापितों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। जमीन पर की गई गन्ने की फसल पर सट्टा नहीं बना है। गेहूं, धान बिक्री का भी पंजीकरण नहीं हो पाता है। 13 विस्थापित परिवारों को जमीन भी नहीं मिल सकी है। वन विभाग के अफसरों ने क्षेत्र में 110 हेक्टेयर वन विभाग की भूमि पर अवैध कब्जा होने की जानकारी दी। हल्का लेखपाल ने राहुलनगर गांव के जंगल की जमीन पर बसे परिवारों की बात अफसरों को बताई। यहां के देवाशीष राय ने बताया कि राहुलनगर गांव में 1976 से बिहार, राजस्थान, पश्चिम बंगाल से आकर बहुत से परिवार बसे हैं। उन्हें अब तक जमीन नहीं मिल सकी। वन विभाग अपनी जमीन बताकर गांव के लोगों का उत्पीड़न करता है। मामला कोर्ट में भी विचाराधीन है।
31 दिन से चल रहा है क्रमिक अनशन
मालिकाना हक के लिए शारदा नदी तट पर 31 दिन से क्रमिक अनशन चल रहा है। आयुक्त ने कहा कि जब मामला कोर्ट में विचाराधीन है तो न्यायालय का ही फैसला माना जाएगा। इसके अलावा जो जमीन है, वहां व्यक्तिगत दावों पर ध्यान दिया जाएगा। विस्थापितों के पास अगर बाहर से आने का कोई रिकॉर्ड है तो वह प्रार्थना पत्र सहित उसे राजस्व टीम को दें। मंडलायुक्त ने इसके बाद तहसील सभागार पहुंचकर शारदापार के विस्थापितों से बात की। यहां डीएम पुलकित खरे, एडीएम, वन विभाग, पूरनपुर, कलीनगर, अमरिया के एसडीएम मौजूद थे।
बैठक में भीड़ देखकर आयुक्त हुए नाराज
चंदिया हजारा के प्राइमरी स्कूल में पहुंचे आयुक्त का भीड़ देखकर पारा चढ़ गया। बोले- स्कूल में बैठक बुलाने को किसने कहा था। उन्होंने बैठक में शामिल लोगों को सामाजिक दूरी का भी पाठ पढ़ाया। आयुक्त ने दरअसल तय किया था कि वह खुद गांव में पहुंचकर लोगों से मिल लेेंगे, मगर स्थानीय अधिकारियों ने स्कूल में बैठक बुला ली और उसमें काफी भीड़ हो गई।
खतौनी से 710 नंबर गायब, कैसे मिला गांव का रकवा
ग्राम पंचायत चंदिया हजारा में वन विभाग की जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर जब कमिश्नर ने लेखपाल को बुलाकर जानकारी की तो लेखपाल ने बताया कि खतौनी से 710 नंबर गायब है। इतना सुनते ही कमिश्नर ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि जब खतौनी से यह नंबर ही गायब है तो पूरे गांव का रकवा कैसे मिल गया। 710 नंबर में किस विभाग की भूमि दर्ज है। इसकी जानकारी लेखपाल नहीं दे सका।
मंडलायुक्त को सौंपे ज्ञापन
पूरनपुर। वकीलों ने कमिश्नर को ज्ञापन देकर शस्त्र लाइसेंस नवीनीकरण पूर्व की भांति कराने, सब रजिस्ट्री कार्यालय में अफसर की तैनाती की मांग की। अंचल एकल अभियान के अध्यक्ष रवि गुप्ता ने जाम से निजात दिलाने, बंदी के दिन सभी प्रतिष्ठानों को बंद कराने, वाहन चालान के नाम पर उत्पीड़न बंद करने, गायब हुए कूड़ेदानों की जांच कराने की मांग की। इसके अलावा कई अन्य लोगों ने भी कमिश्नर मांग संबंधी ज्ञापन सौंपे।