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आम लोगों के साथ दो घंटे के जाम में फंसे रहे कई विधायक

Thu, 17 Aug 2017 12:43 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो पीलीभीत।
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जाम - फोटो : अमर उजाला
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-शिक्षामित्रों को मनाने में अफसरों के छूटे पसीने, बाद में एएसपी ने दिखाई सख्ती 
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समायोजन रद्द करने के आदेश के बाद से अपनी नौकरी बचाने के लिए आंदोलन कर रहे शिक्षामित्रों को सरकार से उम्मीद बंधी थी लेकिन अब तक आश्वासन का कोई नतीजा सामने नहीं आया तो यहां आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक अपनी बात पहुंचाने के लिए शिक्षामित्रों ने जाम का सहारा लिया। एक तरफ समूचा पुलिस-प्रशासन बुधवार को मुख्यमंत्री का दौरा सही-सलामत निपटाने मेें जुटा हुआ था, दूसरी ओर शिक्षामित्रों ने टनकपुर हाइवे जाम कर दिया तो अफसरों के हाथ-पैर फूल गए। जाम लगाए शिक्षामित्र सिर्फ एक ही मांग पर अड़े थे- मुख्यमंत्री से अपनी मुलाकात लेकिन अफसरों के लिए यह मुश्किल काम था। 
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्राथमिक विद्यालयों से सहायक अध्यापक के पद पर समायोजन रद्द होने के बाद से आंदोलनरत शिक्षामित्र बुधवार को बीएसए कार्यालय में जमा हुए। इसके बाद जुलूस की शक्ल में नारेबाजी करते हुए गांधी सभागार में आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात करने निकले। उनकी मांग थी कि उनको वापस सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति दी जाए। इसी मांग को लेकर संगठन के नेताओं के साथ सैकड़ों शिक्षामित्र सीएम से मिलने को आगे बढ़े। इधर प्रशासनिक अमले को इसकी सूचना मिली। जिसके बाद सिविल लाइन चौकी पर ही शिक्षामित्रों को रोकने की तैयारी शुरू कर दी गई। भारी संख्या में पुलिस बल और पीएसी को मुस्तैद कर दिया गया। सीओ सिटी धर्म सिंह मार्छाल मौके पर पहुंच गए और रस्सा, मोबाइल बैरियर सड़क पर लगाकर तैयारी शुरू कर दी। शिक्षामित्रों के पहुंचते ही पुलिस ने हाईवे को घेर लिया और उनको आगे नहीं जाने दिया। इस पर शिक्षामित्र हाईवे पर धरने पर बैठ गए। सिटी मजिस्ट्रेट अवधेश मिश्रा और सीओ सिटी से सीएम से मुलाकात कराने की मांग करते रहे। इस बीच बैठक समाप्त कर योगी के लौटने का पता लगते ही शिक्षामित्र गुस्सा गए। सिविल लाइन चौकी के बाहर टनकपुर हाईवे पर जाम लगाकर नारेबाजी शुरू कर दी। अफसरों ने शांत कराने की कोशिश की, लेकिन असफल रहे। इधर मुख्यमंत्री की बैठक से लौट रहे शहर विधायक संजय सिंह गंगवार की गाड़ी को शिक्षामित्रों ने रोक लिया। उनकी गाड़ी के आगे लेटकर नारेबाजी की गई। अन्य तीनों विधायकों को भी मौके पर बुलाने की मांग पर अडिग हो गए। पहले तो काफी देर तक विधायक कार में ही बैठे रहे और अफसरों को साइड दिलाने का इशारा किया। बाद में शिक्षामित्रों से बातचीत कर बताया कि उनके मुद्दे पर भी विचार जारी है। भाजपा जिलाध्यक्ष सुरेश गंगवार ने भी बातचीत कर आश्वस्त किया, पर शिक्षामित्र जाम खोलने को तैयार नहीं हुए। इसके बाद विधायक दूसरे रास्तों से निकल गए। इधर, शिक्षामित्रों का जाम न खुलने पर वाहनों की लंबी कतार लग गई। कुछ एंबुलेंस के भी जाम में फंसे होने की सूचना अधिकारियों को मिली। जिसके बाद एएसपी रोहित मिश्रा, सीओ अनुराग दर्शन, एलआईयू इंस्पेक्टर सर्वेंद्र सिंह ने सख्त रवैया अपनाया। फोर्स के साथ सड़क घेरे शिक्षामित्रों को हटाना शुरू कर दिया। जिसको लेकर कई बार बहस होती रही। बाद में शिक्षामित्र संगठनों के नेताओं द्वारा हटने की बात कही और जाम खोल दिया गया।       
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हाईवे पर लगी रही वाहनों की कतार
शिक्षामित्रों का प्रदर्शन करीब दो घंटे तक रहा। जिससे टनकपुर हाईवे पर दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतार लगी रही। जिसको देखते हुए पुलिस ने आसाम चौराहा, न्यूरिया, गौहनिया चौराहा, खकरा की तरफ ट्रैफिक को रोक दिया और वहीं से वाहन गुजारे जाने लगे। हालात यह रहे कि शिक्षामित्रों के हाईवे से हटने के बाद भी स्थिति सामान्य करने के लिए एक घंटे लग गए। इसमें स्कूली बच्चों के साथ-साथ चिलचिलाती धूप में खड़ी रोडवेज बसों में बैठे यात्री भी काफी परेशान दिखे।
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उजागर हुई अफसरों की लापरवाही
प्रदर्शन के दौरान जहां लोग परेशान हुए वहीं अफसरशाही का लापरवाह नजरिया भी सामने आ गया। प्रशासन को शिक्षामित्रों के कार्यक्रम की पहले से जानकारी थी। ऐसे में अगर शिक्षामित्रों की मुख्यमंत्री से मुलाकात कराई नहीं जा सकती थी, फिर अधिकारी उनको पहले ही क्यों नहीं रोक सके। उनसे बातचीत कर आश्वस्त किया जा सकता था। सिविल लाइन चौकी पर उनके पहुंचने के बाद भी अफसरों का नजरिया समझ से परे रहा।
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