भगवान शिव के विवाह के रूप में मनाए जाने वाला महाशिवरात्रि पर्व शुभता का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि महाशिवरात्रि का दिन महाशुभ होता है, इसलिए इस दिन से विभिन्न शुभ कार्यों की शुरूआत भी की जाती है। इधर पर्व के चलते जिले भर के शिव मंदिरों में सोमवार देर शाम तक तैयारियां चलती रहीं। रंगबिरंगी रोशनी व फूलों से मंदिरों को भव्य रूप दिया जा रहा है। मंगलवार सुबह भोर होते ही शिवालयों में शिवभक्तों का सैलाब उमड़ेगा।
फूलों से सजा गौरीशंकर मंदिर
शहर के गौरीशंकर मंदिर परिसर में सोमवार देर रात तक तैयारियां पूरी कर ली गईं। इस ऐतिहासिक मंदिर में स्वयंभू शिवलिंग हैं। मंदिर के पंडित जयशंकर शर्मा ने बताया कि मंगलवार सुबह चार बजे से शिवभक्तों द्वारा शिव आराधना शुरू कर दी जाएगी। रात 12 बजे से रुद्राभिषेक का कार्य शुरू हो जाएगा। बुधवार सुबह तड़के भोले कर शृंगार किया जाएगा। इसके बाद हवन व आरती होगी। दस बजे से बम भोला भंडारा शुरू होगा जो शाम तक जारी रहेगा। भगवान शिव की आरती के बाद से जलाभिषेक शुरू हो जाएगा। शाम आठ बजे भस्म आरती होगी।
अर्द्धनारीश्वर महादेव का स्वर्ण आभूषण से शृंगार
महाशिवरात्रि पर्व के चलते स्टेशन रोड स्थित श्री अर्द्धनारीश्वर शेरोंवाला शिव मंदिर को भी भव्य रुप दिया गया है। मंदिर के पुजारी पंडित नितिन कुमार वाजपेई ने बताया कि शिवभक्तों का मंगलवार सुबह साढ़े चार बजे से आने सिलसिला शुरू हो जाएगा। सायं सात बजे से जलाभिषेक व रात्रि नौ बजे आरती होगी। इससे पूर्व भोले बाबा का सोने व चांदी के आभूषणों से शृंगार किया जाएगा। 14 फरवरी को विशाल भंडारा होगा। मंदिर के प्रबंधक बाबूराम शर्मा ने बताया कि यह मंदिर करीब सवा सौ साल पुराना है।
दूधियानाथ मंदिर में 11 बजे से रुद्राभिषेक
शहर के प्राचीन दूधियानाथ मंदिर को भी रंगबिरंगी रोशनी से सजाया गया। बुजुर्गों के मुताबिक इस मंदिर में स्वयंभू शिवलिंग हैं। मंदिर के पुजारी पंडित कामता प्रसाद ने बताया कि शिव भक्त के आने का क्रम मंगलवार सुबह तड़के से ही शुरू हो जाएगा। रात्रि 11 बजे से रुद्राभिषेक कार्यक्रम होगा। बुधवार सुबह हवन व उसके बाद शृंगार आरती कार्यक्रम होगा। उन्होंने बताया कि दोपहर 12 बजे से कढ़ी चावल का भंडारा होगा।
गौरीशंकर मंदिर को फूलों से सजाते हैं मुस्लिम युवा
पीलीभीत की गंगा जमुनी तहजीब यहां के लोगों को विरासत में मिली है और आज भी यह यहां के लोगों में जिंदा है। इसका जीता जागता उदाहरण है शहर का ऐतिहासिक गौरीशंकर मंदिर। 18वीं सदी में इस मंदिर के भव्य द्वार का निर्माण मुस्लिम शासक हाफिज रहमत खां ने करवाकर हिंदू मुस्लिम एकता की मिसाल कायम की थी। वहीं आज कुछ मुस्लिम युवा पिछले पांच-छह सालों से शिवरात्रि पर्व पर मंदिर को फूलों से सजाकर जिले की तहजीब को बनाए हुए हैं। यहां शिवरात्रि पर्व पर मंदिर की फूलों से सजावट का जिम्मा शहीद अनवर ही संभालते आ रहे हैं। सजावट करने वाले मोहम्मद इब्राहिम, अलमुद्दीन बताते हैं कि वह पिछले पांच-छह साल से फूलों से मंदिर को सजाते आ रहे हैं। इस बार भी मंदिर को पिछले सालों की अपेक्षा बेहतर ढंग से सजाया जा रहा है। इसके लिए दिल्ली समेत कुछ अन्य स्थानों से फूल मंगवाए गए हैं।
व्यतिपात योग में मिलेगा अक्षय फल
महा शिवरात्रि पर्व इस बार दो दिन 13 व 14 फरवरी को मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्य पं. नारायण स्वरूप शर्मा के अनुसार 13 फरवरी को शिवरात्रि भी है और भौम प्रदोष भी। सिद्धियोग दोपहर 2.32 बजे तक व इसके बाद व्यतिपात योग शुरू होगा। महानिशीध काल रात्रि 11.46 बजे से 12.37 बजे तक रहेगा। ज्योतिषचार्य के मुताबिक व्यतिपात योग में की गई आराधना तथा दान का अक्षय व कोटिश फल मिलता है। भगवान शिव रात्रि के अधिष्ठाता हैं। महानिशीध काल में व्यतिपात योग कष्टों से छुटकारा देगा। मंगलवार की शिवरात्रि रोग व शोक से मुक्ति देती है। शिवरात्रि पर्व दोनों दिन सिद्धियां देगा। वहीं बुधवार को भी शिव आराधना का फल मिलेगा। इस दिन चंद्रमा अपने श्रवण नक्षत्र पर विराजमान रहेगा।
शिवरात्रि पर ये करें-
जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, मंत्र जाप, शिवपार्वती विवाह की कथा, बेलपत्र, भांग, धतूरा, गुड़, तिल, दूध-दही, शहद का अर्पण करें। महानिशीध काल की आराधना सर्वाधिक फल देती है।
बुधवार को भी करें जलाभिषेक
ज्योतिषचार्य के मुताबिक शिवरात्रि व्रत का पारण करने से पूर्व भगवान शिव का सपरिवार जलाभिषेक व पूजन करें। तभी व्रत पूर्ण फलदायी होगा। डायबिटीज पीड़ित व्यक्ति गन्ने के रस से रुद्राभिषेक करें। धन प्राप्ति को दूध से व रोगी व्यक्ति शक्कर से व निर्धनता का नाश करने के लिए दही से रुद्राभिषेक करें।