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इंसान और पक्षियों की जान का दुश्मन बना चाइनीज मांझा

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पीलीभीत। कहने को तो चाइनीज मांझे पर सरकार ने प्रतिबंध लगा रखा है, लेकिन दुकानदारों पर यह प्रतिबंध बेअसर है। प्रशासन चाइनीज मांझे की बिक्री पर रोक नहीं लगा पा रहा है। शहर में हर माह पांच लाख रुपये से ज्यादा के चाइनीज मांझे की बिक्री होती है। चाइनीज मांझा इंसानों की गर्दन और चेहेरों को तो चोट पहुंचाता ही है, पक्षियों की जान का भी दुश्मन है। आसमान में उड़ने वाली चिड़ियां आए दिन चाइनीज मांझे में फंसकर घायल होती हैं।
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यूं तो चाइनीज मांझे का गढ़ बरेली है। अधिकांश चाइनीज मांझा (स्थानीय बोली में इसे नॉयलोन माझा भी कहते हैं) बरेेली में आने के बाद ही पीलीभीत में सप्लाई होता है। शहर के पतंग कारोबारी बरेली से बड़ी तादाद में देशी मांझे की आड़ में चाइनीज मांझा भी शहर लाकर उसकी बिक्री करते है। शहर के कोतवाली चौराहा, जामा मस्जिद, चौक बाजार, बरेली गेट के आसपास चाइनीज मांझा बिकता है। हाल ही में बीती मकर संक्रांति और आने वाली वसंत पंचमी पर शहर में पतंगबाजी होती है। पंतगबाजी के शौकीन युवा अभी से वसंत पंचमी पर पतंगें उड़ाने के लिए चाइनीज मांझे की खरीदारी में जुटे हैं। प्रशासन की ओर से चाइनीज मांझे की बिक्री पर रोक के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया है। कोतवाली चौराहा की एक दुकान पर बच्चे और युवा चाइनीज मांझा खरीदते हुए कभी भी देखे जा सकते हैं। बृहस्पतिवार को भी यही हाल था, अधिकांश दुकानों पर चाइनीज मांझा खुले में न रखकर अंदर रखे थे। इस चाइनीज मांझे की बिक्री को लेकर एक दुकानदार से इस बारे में बात की गई तो उसने बताया कि मार्केट में लाखों का माल मंगा चुके हैं। यदि चाइनीज मांझा नहीं बेचा तो उनको बचेगा क्या। सूत के मांझे की बिक्री से कुछ बचता नहीं। जब दुकानदार को चाइनीज मांझे पर प्रतिबंध लगे होने की बात बताई गई तो वह चौकन्ने हो गए। फिलहाल, स्टेडियम रोड, रंगीलाल चौराहा, पंजाबियान मोहल्ला, तखान मोहल्ले, चौक बाजार, शरीफ खां चौराहा, कमल्ले चौराहे से बेलों का चौराहा जाने वाले रास्ते पर चाइनीज मांझा खूब बिक रहा है।
चाइनीज माझे में शीशे को गलाकर प्लास्टिक की मजबूत डोर बनती है। इसमें केमिकल का मिश्रण होता है। यह मांझा स्थानीय मांझे से आधी कीमत पर मिलता है। प्लास्टिक युक्त होने की वजह से इस मांझे से उड़ने वाली पतंग आसानी से कटती भी नहीं है। दुकानदारों को चाइनीज मांझे में अच्छी खासी बचत होती है। चाइनीज मांझे से होने वाले हादसों को देखते हुए प्रशासन ने बहुत पहले इसकी बिक्री पर रोक लगाने की घोषणा की थी। मगर, पिछले पांच साल से बाजार में चाइनीज मेड नायलॉन मांझा बाजार में खूब बिक रहा है।
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चाइनीज मांझे की चपेट में आकर मंगलवार को मोहल्ला खकरा के निवासी स्वतंत्र देवल ओवरब्रिज के ऊपर घायल हो गए। चाइनीज मांझे से उनकी गर्दन पर गहरा घाव हो गया। शहर के एक निजी अस्पताल में अब भी उनका उपचार चल रहा है। इससे पहले भी चार से पांच स्कूटी और बाइक चालक चाइनीज मांझे की चपेट में आकर घायल हो चुके हैं। सूत का मांझा शरीर के अंगों से टकराने के बाद कमजोर होकर टूट जाता है। वहीं चाइनीज मांझा टकराने के बाद शरीर को ही काटने लगता है।
चाइनीज मांझे से इंसान ही नहीं, बल्कि आसमान में उड़ने वाले पक्षियों की जान के लिए भी खतरा है। पतंगबाजी के शौकीन युवा सूत के मांझे का प्रयोग न करके चाइनीज मांझे से पंतग उड़ाते है। पतंग उड़ते समय चाइनीज मांझे में अक्सर पक्षी फंसकर घायल होते हैं और फड़फड़ाकर जमीन पर गिरते हैं। तमाम पक्षियों की मौत तक हो चुकी है। मगर, इस ओर किसी ने भी गौर नहीं किया।
चाइनीज मांझे की बिक्री को लेकर व्यापारियों के साथ बैठक की गई। इसमें व्यापारियों को चाइनीज मांझे के खतरों के प्रति जागरूक करेगें। साथ ही पुलिस के साथ छापे डाले जाएंगे। चाइनीज मांझा बेचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। -अरुण कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट
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