धान खरीद की हकीकत परखने को शासन के निर्देश पर क्रय केंद्रों का निरीक्षण होना था। लेकिन निरीक्षण करने का कोई आदेश न मिलने के कारण अधिकारी जांच करने ही नहीं पहुंचे वहीं कुछ ने कागजों में भी जांच रिपोर्ट दे दी। जांच न होने से क्रय केंद्रों पर किसान से लूट की हकीकत सामने नहीं आ सकी।
जिले में पहली अक्तूबर से सरकारी धान खरीद चल रही है। 40 दिन से चल रही इस खरीद में अधिकांश क्रय केंद्र सूने पड़े हैं लेकिन कागजों में खरीद लगातार बढ़ रही है। शासन के निर्देश पर धान खरीद की हकीकत परखने को जिला स्तरीय अधिकारियों से जांच कराई जानी थी लेकिन खाद्य विभाग ने एडीएम की संस्तुति पर 18 अधिकारियों की ड्यूटी शनिवार शाम को लगा दी लेकिन रविवार को छुट्टी के कारण अधिकांश अधिकारियों को ड्यूटी की सूचना तक नहीं पहुंचाई। जानकारी न होने के कारण अधिकारी सुबह 12 बजे गांधी सभागार में होने वाली बैठक में पहुंचे हालांकि बैठक को ऐन वक्त पर धान खरीद की जांच के कारण ही स्थगित कर दिया। शाम को पांच बजे से पुन: चुनाव को लेकर डीएम की अध्यक्षता में बैठक होनी थी। इस बीच कुछ अधिकारियों ने आसपास के क्रय केंद्रों का निरीक्षण कर औपचारिकता पूरी कर ली जबकि जानकारी न होने के कारण कई अधिकारी निरीक्षण को नहीं गए। वहीं क्रय केंद्रों पर तौल न होने से किसान बिचौलियों और व्यापारियों के हाथ लुटते रहे।
जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी सुरेश कुमार यादव ने बताया कि क्रय केंद्र निरीक्षण की सूचना सभी अधिकारियों को भेजी गई है। निरीक्षण भी हुए हैं। इसकी रिपोर्ट दूसरे दिन प्राप्त होने पर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
अब तक हुई 70 हजार एमटी खरीद
सरकारी खरीद केंद्र भले ही सूने पड़े हों लेकिन राइस मिलर्स से सीधी मिलीभगत के कारण अभिलेखों में खरीद लगातार बढ़ रही है। सोमवार तक जिले के 92 खरीद केंद्रों पर 70 हजार मीट्रिक टन खरीद दर्शायी जा चुकी है।