पीलीभीत। कोविड-19 के संक्रमण को रोकने के लिए सरकारी और निजी अस्पतालों में ओपीडी सेवा पर रोक लगी है। कुछ दिन पहले ज्यादा गंभीर मरीजों को राहत देने के लिए टेलीमेडिसन सेवा शुरू की गई थी। प्राइवेट नर्सिंग होम के डॉक्टरों ने टेलीफोन पर मरीजों को दवा नहीं बता रहे, बल्कि दूसरे बहानों से उन्हें अपने अस्पताल बुला ले रहे हैं। वहां दोगुनी फीस का पर्चा बनाया जा रहा है। कई अस्पतालों में ओपीडी का काम धड़ल्ले से हो रहा है।
कोराना वायरस के संक्रमण को देखते हुए शासन ने ने सरकारी और निजी अस्पतालों में ओपीडी पर रोक लगाते हुए केवल आपातकालीन सेवाएं ही चालू रखने के आदेश दिए थे। इस बीच छोटी-छोटी बीमारी जैसे खांसी, बुखार, पेट दर्द में परेशानियों के मामलों में लोगों को परेशान होते देखा गया। मामला संज्ञान में आने पर शासन के निर्देश पर प्रशासन ने 28 अप्रैल से टेलीमेडिसिन सेवा शुरू कराई। इसमें करीब 50 से अधिक डॉक्टरों ने अपने मोबाइल फोन नंबर प्रशासन द्वारा सार्वजनिक रूप से जारी किए। प्रशासन ने तय किया था कि मरीज संबंधित रोग विशेषज्ञ डॉक्टर के मोबाइल नंबर पर कॉल कर निशुल्क उचित परामर्श ले सकते हैं। शुरूआत में एक-दो दिन तो मरीजों को टेलीमेडिसिन सेवा का लाभ मिला, मगर बाद में टेलीमेडिसिन सेवा कागजों में सिमट कर रह गई। इसकी आड़ में कुछ अस्पताल और नर्सिंग होम संचालकों ने शासनादेश की धज्जियां उड़ाते हुए ओपीडी सेवा शुरू कर दी। शहर के तमाम नर्सिंग होम मरीजों को 500 रुपये का पर्चा 1000 रुपए में बनाकर दे रहे हैं। वह भी पांच दिन या एक हफ्ते के लिए नहीं, बल्कि केवल एक दिन के लिए। इस मामले की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को न हो। जब ऐसे मामलों की शिकायत हुई तो मात्र दो-तीन निजी डॉक्टरों को नोटिस देकर इतिश्री कर ली गई।
दोगुनी फीस लेकर देख रहे मरीज
टेलीमेडिसिन सेवा से कोई लाभ न देखकर मरीजों ने निजी अस्पतालों के चक्कर लगाने शुरू कर दिए हैं। शुक्रवार को स्टेडियम रोड स्थित कुछ निजी नर्सिंग होम में ओपीडी सेवाएं चलती मिलीं। एक नर्सिग होम संचालक ने तो मरीजों को इंट्री गेट से प्रवेश न देकर गली में लगे गेट पर मरीजों की लाइन लगवा रखी थी, ताकि कोई अफसर यदि मेन रोड से गुजरे तो उसकी नजर मरीजों पर न पड़े। वहीं एक अन्य बड़े अस्पताल में ओपीडी सेवाएं चलती देखी गईं। ये सब सामान्य दिनों से दोगुनी फीस लेकर मरीजों को देख रहे हैं। इनका पर्चा भी पांच दिन के बजाय एक दिन ही चलता है। मरीजों पर अहसान करने का दिखावा करने वाले कुछ डॉक्टर मरीजों से एक दिन के पर्चे के 800 रुपये तक वसूल रहे हैं। मरीज को इलाज तो करवाना ही है। मरीज और तीमारदार न चाहते हुए भी शोषण का शिकार हो रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग भी मजबूर
स्वास्थ्य विभाग चाहते हुए भी नियमविरुद्ध तरीके से ओपीडी संचालित करने वाले नर्सिंग होम पर कार्रवाई नहीं कर पा रहा है। इसकी वजह यह है कि स्वास्थ्य विभाग जिस डॉक्टर पर शिकंजा कसता है, वह खुद को किसी न किसी नेता का करीबी बताकर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों पर दबाव बना देता है।
शहर में टेलीमेडिसन सेवा एक दिखावा है। फोन नंबर पर डॉक्टर ढंग से बात तक नहीं करते। मजबूरन इलाज कराने के लिए अस्पताल में ज्यादा फीस देकर आना पड़ रहा है। -वसीम, मदीनाशाह
कुछ दिन पूर्व मामा की तबियत खराब हुई थी। डॉक्टरों ने कॉल ही रिसीव नहीं की। हालात ही ऐसे थे कि एक निजी अस्पताल में दोगुनी फीस देकर इलाज कराना पड़ा। -राजकरन, बेनीचौधरी
प्रशासन के निर्देशानुसार टेलीमेडिसिन सेवा की रेंडम चेकिंग की जा रही है। यदि कोई डॉक्टर मरीज की कॉल रिसीव नहीं करता है तो मरीज सीएमओ कार्यालय के कंट्रोल रूम नंबर 05882-250200 पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। -डॉ. वीबी राम, नोडल अधिकारी, टेलीमेडिसिन सेवा