पीलीभीत। जिला महिला अस्पताल में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के दावों के बीच मरीजों को दुश्वारियाें का सामना करना पड़ रहा है। तीन मंजिला इमारत पर चढ़ने उतरने के लिए भले ही लिफ्ट लगाई गई हो, लेकिन पांच वर्षों से संचालन न होने के कारण महिला मरीजों के लिए रैंप सहारा बना हुआ है। वहीं, गर्भवतियों को अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल परिसर की एमसीएच विंग में महिला अस्पताल का संचालन किया जाता है। शहर के अलावा जिलेभर से महिलाएं बेहतर उपचार की आस में अस्पताल पहुंचती हैं। इनमें गर्भवती महिलाओं की संख्या अधिक रहती है।
अस्पताल में नीचे तल पर ओटी और प्रथम तल पर ओपीडी और जांच की सुविधा दी जा रही है। तृतीय तल पर मरीजों को भर्ती किया जाता है। तीन मंजिला इमारत होने के चलते सुविधा का ध्यान रखते हुए भवन में लिफ्ट लगाई गई थी। दावा किया गया था गर्भवती महिलाओं को प्रथम और द्वितीय पर जाने के लिए आसानी होगी, लेकिन कई साल बीतने के बाद भी लिफ्ट का संचालन नहीं हो सका। मजबूर होकर गर्भवती रैंप के सहारे ही प्रथम और द्वितीय तल पर जा रही है।
जांच के लिए लगाने पड़ते हैं कई चक्कर
मरीज और तीमारादारों का कहना है कि ओपीडी में चिकित्सक जांच लिखते हैं। प्रसव के समय पर भी जांच कराई जाती हैं। ऐसे में द्वितीय तल पर जांच की सुविधा होने की वजह से कई चक्कर लगाने पड़ते हैं। इससे कई प्रकार की समस्याएं होती हैं। कई बार तो मरीजों को भी साथ में लाना पड़ता है। इससे वह भी परेशान होती है। चढ़ने में करीब 10 मिनट का समय लग जाता है। बावजूद जिम्मेदार इस लिफ्ट को सही कराने की जहमत नहीं उठा रहे है।
महिला अधिकारी के फंसने के बाद भी नहीं जागे अफसर
विभागीय कर्मचारियों के मानें तो भवन के संचालित होने के बाद से यह लिफ्ट नहीं चल सकी। इससे पूर्व अस्पताल की ही एक महिला अधिकारी लिफ्ट का प्रयोग करने के दौरान उसमें फंस गई थी। बमुश्किल उन्हें लिफ्ट से निकाला जा सका था। इसके बाद से इस लिफ्ट को मरम्मत के नाम पर बंद कर दिया गया और तब से यह लिफ्ट बंद ही पड़ी है।
पत्नी को भर्ती कराया है। दूसरे तल पर भर्ती कराना पड़ा। लिफ्ट के न होने से काफी दिक्कत होती है। बार-बार ऊपर नीचे कई चीजों को लेकर चक्कर काटने होते है। - वीरेंद्र, तीमारदार।
बहू को भर्ती कराया है। दूसरे तल पर है। कई कामों के लिए ऊपर नीचे दौड़ना होता है। लिफ्ट के सही न होने से दिक्कत है। सबसे ज्यादा दिक्कत मरीज को लाने ले जाने में होती है।- धनीराम, तीमारदार।
बहू को चार दिन पूर्व भर्ती कराया था। दूसरे तल पर लेकर आने में काफी दिक्कत हुई। खुद ही ऊपर तक लेकर आए थे। कर्मचारी भी कोई साथ नहीं आया। - नंदरानी, तीमारदार।
लिफ्ट सही कराने के लिए विभागीय अधिकारियों को पत्राचार किया गया है। जल्द ही लिफ्ट को सही करा दिया जाएगा। जिससे गर्भवती महिलाओं को इसका लाभ मिल सके।- डॉ. राजेश कुमार, सीएमएस, महिला अस्पताल।
धनीराम।
धनीराम।