क्षेत्र के किसानों को एलएच मिल ने ट्रांसपोर्ट व्यय के रूप में काटी गई धनराशि का भुगतान नहीं किया है। इससे उनमें नाराजगी है। किसानों ने बैठक कर जल्द भुगतान न होने पर एलएच मिल को गन्ना न देने की निर्णय लिया है। इस बाबत किसानों ने गन्ना आयुक्त को ज्ञापन भी भेजा है।
मझोला चीनी मिल बंद होने के बाद इलाके के किसानों को पीलीभीत की एलएच मिल से संबद्ध कर दिया गया था। इसके बाद से क्षेत्र के किसान एलएच मिल को गन्ना दे रहे हैं लेकिन मिल प्रबंधन ने वर्ष 2015-16 में किसानों से ट्रांसपोर्ट व्यय के नाम पर 8.75 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से कटौती कर ली। किसानों ने बेचे गए गन्ने और मिल से मिले भुगतान का हिसाब जोड़ा तो इसमें अंतर मिलने पर इसकी जानकारी हुई। इस पर किसानों ने सोमवार को कस्बे में बैठक कर नाराजगी व्यक्त की। किसानों का कहना है कि किसान मझोला मिल गेट पर गन्ना सप्लाई करते थे। उन्हें बाद में एलएच मिल से जोड़ दिया गया। ऐसे में ट्रांसपोर्ट के नाम पर की गई कटौती का भुगतान न करना गलत है। किसानों ने बैठक में निर्णय लिया कि यदि एलएच मिल इसका भुगतान नहीं करती है तो आगामी सीजन में वह अपना गन्ना एलएच मिल को नहीं देंगे। इस बाबत किसानों ने ज्ञापन भी गन्ना आयुक्त को भेजा है। इसमें मझोला क्षेत्र के किसानों को बरखेड़ा स्थित बजाज मिल से जोड़ने की मांग की गई है। बैठक में अजय सिंह, नरेंद्र सिंह, अशोक भसीन, निरंजन सिंह, सतनाम सिंह, पुलिन मंडल, शंकर मंडल, तुषार कांत, राजेंद्र सिंह, अनिल कुमार, जेके भसीन, शिवनरेश सहित कई किसान थे।