सैलानियों को मिलेगा आधुनिक सफारी अनुभव
परियोजना के तहत, पीलीभीत और शाहजहांपुर की ओर से दो आकर्षक प्रवेश द्वार बनाए जाएंगे। परिसर में लैपर्ड प्रूफ फेंसिंग, सफारी ट्रैक, रेस्क्यू इंक्लोजर, वन्यजीव चिकित्सालय, सीसीटीवी निगरानी, आधुनिक स्वागत कक्ष, 50 सीटों वाला थिएटर, प्रकृति परिचय केंद्र और सफारी वाहनों की व्यवस्था होगी। थियेटर में पर्यटकों को तेंदुओं के जीवन, उनके संरक्षण और जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़ी जानकारी दिखाई जाएगी।
पर्यटन को मिलेगा नया आयाम
तेंदुआ सफारी पार्क बनने से पीलीभीत पर्यटन मानचित्र पर और अधिक मजबूत होगा। पार्क लखनऊ से लगभग 260 किलोमीटर और बरेली से करीब 55 किलोमीटर की दूरी पर स्थित होगा। राज्य राजमार्ग-730 और 730ए से इसकी सीधी कनेक्टिविटी रहेगी। निकटतम रेलवे स्टेशन पीलीभीत, बरेली और शाहजहांपुर होंगे, जबकि लखनऊ, बरेली, पंतनगर और दिल्ली के हवाई अड्डों से भी यहां आसानी से पहुंचा जा सकेगा।
एक रेंजर, छह वन दरोगा समेत नियुक्त होगा स्टाफ
पार्क का संचालन शुरू होने पर बड़ी संख्या में स्टाफ को नियुक्त किया जाएगा। इसके लिए एक रेंजर, छह वन दरोगा, 10 वन रक्षक, तीन कंप्यूटर ऑपरेटर, दो सूचना केंद्र सहायक, 15 सफाई कर्मी, पांच रात्रिकालीन सफाई कर्मी, दो स्थानीय चालक तथा प्लंबर, इलेक्ट्रीशियन, मैकेनिक, द्वारपाल सहित अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति की जाएगी।
सामाजिक वानिकी प्रभाग पीलीभीत के डीएफओ भरत कुमार डीके ने बताया कि प्रदेश के पहले तेंदुआ सफारी पार्क के लिए 12 जुलाई तक बजट जारी होने की उम्मीद है। अक्तूबर माह में शिलान्यास कार्यक्रम के अलावा जनवरी तक पार्क को विकसित करने की योजना है। यह परियोजना सिर्फ एक सफारी पार्क नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण, इको-टूरिज्म और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाली महत्वाकांक्षी पहल के रूप में देखी जा रही है।