थाना क्षेत्र की ग्राम पंचायत बराही निवासी कुलवंत सिंह का फार्महाउस जंगल से कुछ दूरी पर है। सोमवार को दोपहर करीब 12.15 बजे गुरुद्वारा जाने को निकल रहे थे। इस दौरान उनके दोनों कुत्ते पेड़ की ओर देखकर भौंकने लगे। कुछ देर तो उन्हें कुछ समय में नहीं आया लेकिन जैसे ही उनकी निगाह पेड़ पर बैठे तेंदुए पर पड़ी वह घबरा गए और शोर मचाते हुए अंदर की ओर भागे। पत्नी व अन्य महिलाओं को भी उन्हें कमरे में कर दिया और स्वयं पुत्र सतवीर सिंह व सुखदीप के साथ शोर मचाना शुरू किया। इस पर तेंदुआ पेड़ से उतरकर घर में ही बने स्टोर नुमा कमरे में घुस गया। काफी देर तक उसके न निकलने पर कुलवंत सिंह ने वनविभाग को सूचना दी। इस पर बराही रेंजर अनिल शाह टीम के साथ मौके पर पहुंचे साथ ही पुलिस भी पहुंची। वनकर्मियों ने फार्म हाउस का मुख्य दरवाजा खुलवा दिया और कमरे की छत पर जाकर छत पर डंडों से पीटकर शोर किया। इस पर तेदुआं स्टोर से बाहर निकला लेकिन मुख्य द्वार से जाकर वह करीब पांच फिट ऊंची बाउंड्री के ऊपर से छलांग मार कर जंगल की ओर चल गया। तेंदुए के जंगल की ओर जाते ही बड़ी संख्या में लोग उसके पीछे दौड़े जिन्हें वनकर्मियों ने रोक लिया।
एसडीएम व सीओ भी पहुंचे
फार्मर के घर में तेंदुआ घुसने की सूचना पर एसडीएम ज्ञानेंद्र कुमार सिंह व सीओ बृजवीर सिंह भी मौके पर पहुंचे लेकिन तब तक तेंदुआ वहां से निकल चुका था। दोनों अधिकारियों ने रेंजर से घटना की जानकारी ली।
रेंजर की बात पर उखड़े फार्मर
तेंदुए के जाने के बाद बराही रेंजर अनिल शाह ने वहां मौजूद सभी फार्मर से कहा कि जंगल किनारे खतरे को देखते हुए वह लोग अपने घरों की बाउंड्रीवाल को ऊंचा कर तार फेसिंग करा लें। इस पर फार्मर उखड़ गए। उन लोगों का कहना था कि जंगल में फेसिंग को उन लोगों ने चंदा कर पांच लाख रुपये दिए थे जिसपर डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की ओर से तार फेसिंग कराई गई थी जो कुछ दिनों बाद नष्ट हो गई। फार्मरों ने टाइगर रिजर्व बनने के बाद वनविभाग द्वारा ही फेसिंग कराने की मांग की।
जंगल से निकलकर तेंदुआ बराही रेंज से सटे कुलवंत सिंह के फार्म पर पहुंच गया था जिसे टीम की मदद से निकाल दिया गया है। निगरानी के लिए दो वनकर्मियों को लगाया गया है।
अनिल शाह, वन क्षेत्राधिकारी बराही