पूरनपुर। चंदिया हजारा ग्राम पंचायत के 60 किसानों की करीब 150 एकड़ जमीन शारदा नदी में समा गई थी। इसका खुलासा बाढ़ से हुए नुकसान के सर्वे के बाद हुआ। अब 60 में सिर्फ पांच किसानों को जमीन के पट्टे दिए गए हैं। इससे अन्य पीड़ित किसानों में रोष है। ग्राम प्रधान वासुदेव कुंडू ने डीएम को पत्र भेजकर एक पूर्व प्रधान को दिए गए पट्टे को भी गलत बताते हुए उसे निरस्त कराने और सभी पीड़ितों को शासन से विशेष अनुमति लेकर पट्टे की जमीन दिलाने की मांग की है।
शारदा नदी की बाढ़ हर साल क्षेत्र में तबाही मचाती है। पिछले साल करीब 200 किसानों की जमीन शारदा नदी में समा गई थी। इस बार बाढ़ और कटान से बचाव को शारदा नदी पर नौ करोड़ रुपये की लागत से चेनेलाइजेशन कराया गया। इतनी ही लागत से तटबंध बनाया गया, लेकिन पहली बाढ़ में ही तटबंध क्षतिग्रस्त हो गया। बाद में खानापूर्ति कर उसकी दोबारा मरम्मत की गई।
इसके बाद भी नदी ने क्षेत्र में तबाही मचाई। 60 किसानों की करीब 150 एकड़ जमीन नदी में समा गई। ग्राम प्रधान वासुदेव कुंडू ने बताया कि इसका खुलासा बाढ़, कटान से हुए नुकसान के सर्वे के बाद हुआ।
प्रधान ने डीएम को भेजे पत्र में कहा है कि प्रस्ताव के सापेक्ष सिर्फ पांच लोगों को ही जमीन के पट्टे दिए गए हैं। इसमें एक पूर्व प्रधान को अनुसूचित जाति के आधार पर, तीन लोगों को सीएम फेस (सीएम के सामने पट्टा दिलाने की मांग) के आधार पर जबकि एक पीड़ित को वास्तव में पट्टा दिया गया है। पत्र में पूर्व प्रधान के अपात्र होने पर उसका पट्टा निरस्त कराने और सभी बाढ़ पीड़ितों को पट्टा दिलाने की विशेष अनुमति लेकर पट्टा दिलवाने की मांग की गई है।
राजस्व परिषद से एक साल में तहसील को एक हेक्टेयर जमीन का पट्टा करने के आदेश है। मुख्यमंत्री के चंदिया हजारा पहुंचने पर तीन महिलाओं ने जमीन नदी में समाने पर जमीन का पट्टा दिलाने की मांग की थी। मुख्यमंत्री ने तीनों महिलाओं को पट्टे की जमीन देने के निर्देश दिए। तीनों महिलाओं और इसके अलावा जमीन की उपलब्धता पर दो अन्य लोगों को जमीन का पट्टा दिया गया है। नियमानुसार पट्टे किए गए हैं। अगर कोई शिकायत होगी तो जांच कराकर कार्रवाई कराई जाएगी।
- वीरेंद्र कुमार तहसीलदार पूरनपुर