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कोरोना योद्धाओं को ही खतरा ना हो जाए, अब तक उनकी स्कीनिंग पर नहीं करा पाए,

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पीलीभीत। कोरोना के खिलाफ जंग जीतने के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार पूरी ताकत से जुटी हैं। शासन-प्रशासन केवल लॉकडाउन का पालन कराने पर जोर दे रहा है। मगर कोरोना योद्धाओं की ओर अभी अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है। आइसोलेशन वार्ड में काम करने वाले डॉक्टर और स्टाफ के अलावा किसी की स्क्रीनिंग नहीं कराई गई। जबकि सफाई, पुलिस कर्मियों के अलावा अन्य स्वास्थ्य कर्मी भी संदिग्ध लोगों के संपर्क में आते हैं। प्रशासनिक अफसर भी रोजाना बाहर आने जाने वालों के संपर्क में आते हैं। दुर्भाग्य से अगर इनमें से कोई भी कोरोना संक्रमित हो गया तो वह और उसका परिवार तो खतरे में पड़ेगा ही, साथ ही बीमारी फैलने का दायरा भी बढ़ जाएगा।
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पुलिस कर्मियों की ड्यूटी रोड पर रहती है, वे कोरोना संदिग्धों को पकड़ने भी जाते हैं। नगरपालिका कर्मी और प्रशासनिक अफसर भी अक्सर भीड़ के बीच में होते हैँ। इसलिए इनके कोरोना संक्रमित होने का खतरा हर समय रहता है। दूसरे प्रदेशों से इस तरह के मामले सामने आए भी हैं। फिर भी तराई बेल्ट में इस गंभीर खतरे को लंबे समय से नजरंदाज किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग से कोरोना योद्धाओं की न तो नियमित स्क्रीनिंग हो रही है, न ही बाहर से आने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया। इससे इनके परिवार और मिलने वालों को भी हर समय खतरा है। स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टर से लेकर फार्मासिस्ट, नर्स और उनका सहयोगी स्टाफ अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भी ड्यूटी करता है। हालांकि यह तो इलाज करते समय निर्धारित ड्रेस पहनते हैं। अपनी सुरक्षा भी रखते हैं। मगर, कोरोना की बीमारी का तुरंत पता नहीं चलता।
विशेषज्ञों का मानना है कि संवेदनशील ड्यूटी करने वालों की भी नियमित स्क्रीनिंग होनी चाहिए। ताकि समय रहते किसी तरह के खतरे का पता चल सके। इनके अलावा फील्ड में ड्यूटी पर लगे पुलिस कर्मी और नगरपालिका सफाई कर्मचारियों की स्क्रीनिंग तक नहीं कराई जा रही है। प्रशासनिक अफसर और उनके सहयोगी स्टाफ की भी अब तक स्क्रीनिंग नहीं हुई है। यह खतरनाक है। अगर रात दिन ड्यूटी करने वाले कर्मियों की स्क्रीनिंग हो तो कोरोना के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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भीड़ में मोर्चा संभाल रही पुलिस को खतरा सबसे ज्यादा
कोरोना संक्रमण को लेकर लॉकडाउन का पालन कराने में अहम भूमिका पुलिस की है। जमातियों से लेकर दूसरे प्रांत से आने वालों को पकड़ने का काम भी पुलिस कर रही है। बाजार में भीड़ बढ़ने पर छूट के समय भी पुलिसकर्मी ही निगरानी पर लगे हैं। एसपी, एएसपी, चार सीओ, 14 थानाध्यक्ष समेत 1500 से अधिक पुलिसकर्मी मुस्तैद हैं। ये ऐसे कोरोना योद्धा की भूमिका में है, जिनको संक्रमण का सर्वाधिक खतरा है। चूंकि किसी भी सूचना पर पहुंचना और अगर कोई भिड़ जाए तो उसको पकड़ने का काम भी करना पड़ता है। वैसे तो विभाग की ओर से सभी को मास्क, सैनिटाइजर, गलब्स आदि दिए गए हैं। थाना और आवासीय परिसर नगरपालिका कर्मचारियों की ओर से सैनिटाइजर का छिड़काव भी कराया जा रहा है। मगर भीड़ के बीच दिन-रात चौराहों पर रहने के चलते इनकी स्क्रीनिंग भी अहम है।
सफाई कर्मचारियों को मुसीबत न बन जाए कोरोना संक्रमण
कोरोना वायरस फैलने के बाद नगरपालिका की पूरी टीम शहर को सैनिटाइज करने को जुटी हुई है। इसके साथ ही साफ सफाई का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। इसको लेकर आउटसोर्सिंग सफाई कर्मचारी से लेकर नियमित कर्मचारी को मिलाकर करीब 300 कर्मचारी काम कर रहे हैं। यह सफाई कर्मचारी दिन भर गंदगी के ढेर के बीच काम करने के साथ कई लोगों के संपर्क में आते हैं। ऐसे में यह संक्रमण फैलने का खतरा रहता है। स्वास्थ्य विभाग को इन सभी लोगों की स्क्रीनिंग करनी चाहिए, लेकिन स्वास्थ्य विभाग सिर्फ बाहर से आने वाले लोगों की ही स्क्रीनिंग करने पर ध्यान दे रहा है।
फैक्ट फाइल
स्वास्थ्य विभाग के जिला स्तरीय अधिकारी - 9
डॉक्टर - 46
संविदा कर्मचारी - 1300
नियमित कर्मचारी - 600
आशाएं - 1500
पुलिस कर्मी - 1900
पुलिस अफसर - 6
प्रशासनिक अफसर - 300
कलक्ट्रेट कर्मचारी - 38
नगरपालिका सफाई कर्मचारी - करीब 300
आइसोलेशन वार्ड में काम करने वाले डॉक्टर और स्टॉफ की स्क्रीनिंग कराई गई है। फिलहाल अभी पुलिसकर्मी और सफाईकर्मी या अन्य किसी कर्मचारी की स्क्रीनिंग नहीं कराई है। इस बारे में शासन से गाइड लाइन भी नहीं है। ऐसे में हम क्या कर सकते हैं।
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- डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ
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