आतंक का पर्याय बन चुके बाघ को जिंदा पकड़ने के बाद वन विभाग की टीम ने देर रात उसे लखनऊ चिड़ियाघर भेज दिया। उसका परीक्षण होने के बाद आगे की रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इधर पीसीसीएफ के निर्देश पर वन संरक्षक वीके सिंह ने चारों हथिनियों को पुरस्कृत किया है। टाइगर रिजर्व से बाहर आकर माधोटांडा थाना क्षेत्र से गजरौला थाना क्षेत्र के गांव तक पहुंचकर आतंक मचाने वाले खूनी बाघ को वन विभाग की टीम ने शनिवार को बेहोश कर पकड़ने में सफलता हासिल की थी। शाम को ही उसे मुस्तफाबाद ले जाया गया जहां परीक्षण के बाद उसे लखनऊ चिड़ियाघर भेज दिया गया। लखनऊ में उसकी जांच रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इधर बाघ के पकड़े जाने से क्षेत्रवासियों के साथ वन विभाग ने भी राहत महसूस की है। बाघ पकड़ने के दौरान हथनी वटालिका जख्मी हो गई थी। बाघ पकड़ने के लिए चलाए गए आपरेशन में हथिनियों की भूमिका को देखते हुए पीसीसीएफ उमेंद्र शर्मा ने उन्हें पुरस्कृत करने की घोषणा की। इस पर वन संरक्षक वीके सिंह ने चारों हथिनियों के महावतों को ढाई-ढाई हजार रुपये का नकद पुरस्कार दिया। वन विभाग के अलावा डब्ल्यूडब्ल्यूएफ से भी उसे सम्मानित कराने की तैयारी है। इसके लिए दिल्ली स्थित मुख्यालय को रिपोर्ट भेजी गई है।
बाघ के मल में मिले अवशेषों का होगा डीएनए
लखनऊ पहुंचे खूनी बाघ की जांच में सबसे ज्यादा फोकस उसके मल की रिपोर्ट पर रहेगा। विभागीय सूत्रों की मानें तो उसके मल में मानव मांस की पुष्टि के लिए डीएनए टेस्ट कराया जाएगा ताकि यह स्पष्ट हो सके कि उसी ने क्षेत्र के लोगों को शिकार बनाया है।
वापस गई लखनऊ व मुंबई की टीमें
बाघ को पकड़ने के लिए लखनऊ से टैंक्युलाइजिंग एक्सपर्ट डॉ. उत्कर्ष शुक्ला, मुख्य वनसंरक्षक पीपी सिंह के अलावा मुंबई से ड्रोन कैमरों के साथ तीन सदस्यीय टीम आई थी। आपरेशन समाप्त होने के बाद सभी टीमें वापस चली गईं।