एक और हमले के बाद पकड़ा गया खूनी बाघ
नंवबर से अब तक जिले में छह लोगों को मार चुका बाघ आखिर पिंजड़े में बंद कर लिया गया। पहले इसे बाघिन माना जा रहा था। शुक्रवार रात कलीनगर चित्तरपुर मार्ग पर टाइल्स फैक्ट्री का चौकीदार गंगाराम राजपूत उसका आखिरी शिकार बना। एक सप्ताह के अंदर यह उसका चौथा शिकार था। तीन को उसने मार दिया जबकि एक महिला घायल है। इस बार उसने चौकीदार का लगभग आधा शरीर खा लिया था।शनिवार को बाघ के पैरों के निशानों का पीछा करते हुए ग्रामीणों ने तीन किलोमीटर दूर एक गन्ने का खेत घेर लिया। फिर दोपहर बाद वन विभाग की टीम और पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। ड्रोन के जरिये खेत में उसकी लोकेशन पता कर चार हाथियों की मदद से उसे घेरा गया। पहले प्रयास में उसने एक हथिनी को भी घायल कर दिया था लेकिन दूसरे प्रयास में उसे निशाना बनाकर ट्रेंक्यूलाइज कर पकड़ लिया गया। गांव के लोग गुस्से में उसे मारने पर आमादा थे। किसी तरह उसे खेत से निकालकर पिंजरे में डाला जा सका। गंगाराम (52) शुक्रवार को फैक्ट्री परिसर में टीन शेड के नीचे मच्छरदानी लगाकर अपनी चारपाई में सो रहे थे। आधी रात के वक्त किसी समय बाघ गंगाराम को दबोचकर फैक्ट्री के बाहर एक खेत में ले गया। आधे से अधिक शरीर को खाने के बाद बाघ सुबह करीब तीन किलोमीटर दूर एक खेत में जा छिपा। सुबह 5.30 बजे फैक्ट्री का कर्मचारी उमाशंकर जब वहां पहुंचा तो गंगाराम गायब था और उसके बिस्तर पर खून पड़ा था। अनहोनी की आशंका में उसने फैक्ट्री मालिक ताहिर खां को इसकी सूचना दी। मौके पर पहुंचे ताहिर खां ने बिस्तर से पास के खेत तक बने घिसटने के निशान देखने शुरू किए तो खेत में गंगाराम का अधखाया शव दिखाई दिया। वनविभाग और पुलिस को इसकी सूचना दी गई। खबर फैलते ही आसपास गांवों के सैकड़ों लोग डंडे हथियार लेकर उधर दौड़ पड़े। इस बीच सूचना पाकर पुलिस और वन विभाग की टीम भी पहुंच चुकी थी। बाघ के पैरों के निशान खोजे गए और उन्हीं का पीछा कर लोग तीन किलोमीटर दूर उस खेत तक पहुंचे जहां वह गन्ने के बीच बैठा था। वन विभाग की टीम ने उसे पकड़ने के लिए हाथियों को लगाया। सही लोकेशन लेने के लिए ड्रोन की मदद ली गई। चार हाथियों पर बैठक वन विभाग के लोगों ने खेत को घेरा। पहली बार हथिनी पर हमला होने के बाद आपरेशन रोक दिया गया था। इसी बीच विभाग ने बाघ को नरभक्षी घोषित कर मारने का भी मन बना लिया था। लेकिन दूसरे प्रयास में उसे निशाना साध कर ट्रेंक्यूलाइज कर लिया गया। इस बीच भीड़ बेकाबू हो गई और बाघ को मारने के लिए दौड़ पड़ी। कई लोगों ने बेहोश बाघ पर डंडे मारे। किसी तरह भीड़ को नियंत्रित कर बाघ को पिंजरे में डाला जा सका। उसे अब किसी चिड़ियाघर में भेजने की तैयारी की जा रही है।