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खांडेपुर गांव, जहां ब्रिटिश हुकूमत को हिलाने के लिए बनाया गया था बम

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स्वतंत्रता सेनानी महाशय रामस्वरूप (ग्राम खांडेपुर तहसील बीसलपुर) - फोटो : PILIBHIT
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सत्यवान अवस्थी
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बीसलपुर (पीलीभीत)। देवहा नदी की तलहटी में बसा खांडेपुर गांव अंग्रेजी राज में क्रांतिकारी गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा था। इस गांव के क्रांतिकारी रामस्वरूप ने अलीगढ़ और गोरखपुर जाकर क्रांतिकारियों से बम बनाने का तरीका सीखा था। उन्होंने अपने क्षेत्र के क्रांतिकारियों के साथ एक पुल उड़ाने की योजना बनाई। यह बात अलग है कि किसी ने अंग्रेजों से मुखबिरी कर दी और वह बम विस्फोट नहीं कर पाए थे।
करीब पांच हजार की आबादी वाले इस गांव के क्रांतिकारियों की स्वतंत्रता आंदोलन में बड़ी भूमिका रही। गांव के लोग इस पर आज भी गर्व करते हैं। गांव के पूर्व प्रधान शरदपाल सिंह ने बताया कि उनके उनके दादा रामस्वरूप स्वतंत्रता सेनानियों बीच कमांडर के रूप में प्रसिद्ध थे। हर घर से अंग्रेजों के खिलाफ बगावती स्वर निकला करते थे। एक अकेले गांव से कई स्वतंत्रता संग्राम सेनानी निकले। उनके मुताबिक गांव से स्वतंत्रता आंदोलन में जिन 23 लोगों ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया, उनमें के अलावा अयोध्या प्रसाद, जगदीश प्रसाद, ख्यालीराम, रघुनंदन प्रसाद, रोशनलाल, सेवाराम, लाहौरी सिंह, चोखेलाल, लालजीत, बैजनाथ, बद्रीप्रसाद, सुमेरलाल, बालकराम, रामचरनलाल, नत्थूलाल, बांधूलाल, सत्यदेव, प्यारेलाल, शिवचरनलाल, छेदालाल, छोटेलाल और चंदनलाल थे। संवाद
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अंग्रेजों को जुल्म, जिन्हें डिगा न पाया
रामस्वरूप का जन्म 5 जुलाई 1896 को हुआ था। उनका निधन 21 दिसंबर 1984 को हुआ था। उन्होंने पांच बार जेल यात्रा की। लगभग साढ़े आठ वर्ष कारावास में रहे। आजादी की लड़ाई के दौरान आए दिन इस गांव में पूरे मंडल के सेनानियों की बैठक होती थी। बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार कोई सेनानी डाक बांटता था, कोई बम बनाता था, कोई अन्य जरूरी काम करता था। शरदपाल ने बताया कि उन्होंने अपने दादा रामस्वरूप से आजादी के दौर की कहानियां सुनीं हैं। अंग्रेजों ने उनके दादा के नाखूनों में बांस की कीलें ठोंकी थीं, लेकिन गोरों का जुल्म उन्हें डिगा नहीं सका।
गायब हो गया गांधी चबूतरा, घोषणा पूरी न हुई
खांडेपुर गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि गांव के बाहर एक गांधी चबूतरा होता था, जो अब गायब है। सिर्फ मैदान बचा है। अगर यहां स्मारक बन जाए तो आजादी के दीवानों के लिए यही एक सच्ची श्रद्धांजलि होगी। वर्ष 1997 में भाजपा के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष और मौजूदा केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इस गांव में आए थे। उन्होंने अपने संबोधन में ग्रामीणों की सामूहिक मांग पर सेनानियों का एक स्मारक बनवाने की घोषणा की थी, लेकिन वह घोषणा आज तक पूरी नहीं हो सकी।
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जिस एक अकेले गांव से बड़ी संख्या में क्रांतिकारी निकले, वह गांव खांडेपुर ही था। गांव के क्रांतिकारी रामस्वरूप ने पुल उड़ाने के लिए बम बनाया। पुल उड़ा नहीं सके पर गिरफ्तारी हुई और सजा भी काटनी पड़ी। राजबहादुर और परेश्वरी दयाल भी बम बनाने के आरोप में गिरफ्तार हुए थे, जो बाद में बरी हो गए थे।
- सुधीर विद्यार्थी, पहचान बीसलपुर के लेखक
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