पीलीभीत। आईएमए की कॉन्फ्रेंस में एम्स के मेडिसन विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अरविंद कुमार ने कहा कि हर स्थिति में दवाओं के अनावश्यक इस्तेमाल से परहेज करें। इलाज के दौरान जरूरत भर की सभी जांचें कराएं और निष्कर्ष के आधार पर दवाओं की संस्तुति करेंगे तो बेहतर रिजल्ट सामने आएंगे। मरीजों को चाहिए कि अगर दवाई सात दिन के लिए लिखी गई तो उसे लगातार 15 दिन तक न खाते रहें, क्योंकि हो सकता है कि सात दिन बाद दवा की मात्रा घटाने या बढ़ाने की जरूरत हो। इसलिए डाक्टर के परामर्श के बगैर किसी दवाई का सेवन न करें।
सर गंगाराम अस्पताल में किडनी रोग विशेषज्ञ डॉ. वैभव तिवारी ने कहा कि ब्लड प्रेशर को सामान्य रखें। अगर ब्लड प्रेशर 140 से अधिक हो रहा है तो तत्काल जांच कराएं। क्योंकि इसका असर किडनी पर पड़ता है। दवाएं लेने के साथ अपनी लाइफ स्टाइल में बदलाव लाएं, क्योंकि ब्लड प्रेशर आपकी दिनचर्चा से भी प्रभावित होता है। अगर ब्लड प्रेशर है तो भोजन और व्यायाम के लिए समय निकालें। श्रीराम मूर्ति स्मारक मेडिकल कॉलेज बरेली से आए घुटना प्रत्यारोपण के विशेषज्ञ डॉ. ध्रुव गोयल ने कहा कि आमतौर पर वृद्धावस्था में घुटनों में तकलीफ हो जाती है। अगर घुटना प्रत्यारोपण की जरूरत है तो उसमें देरी न करें क्योंकि नई तकनीक में आधे घंटे के आपरेशन में प्रत्यारोपण हो जाता है। एक दिन के आराम के बाद मरीज चल पाने की स्थिति में होता है। इसलिए क्वालिटी की लाइफ को हर उम्र में जी सकते हैं। डॉ. ऋषि भाटिया ने चिकित्सा संबंधी मेडिकोलीगल विषय में बताया। महिला चिकित्सक डॉ. रीता बख्शी समेत कई चिकित्सकों की भागीदारी रही।
अपनी मर्जी से खाएंगे एंटी बायोटेक दवाएं तो आएगी दिक्कत ज्यादा
पीलीभीत। एम्स में मेडिसन विभाग के असिस्टेंट डॉक्टर अरविंद कुमार ने कहा कि देश में लाखों लोग लोग ऐसे हैं जो जरा सी तकलीफ होने पर एंटीबायोटिक दवा ले लेते हैं । ऐसा एक बार नहीं बार-बार करते हैं। कई स्थानों पर डाक्टरों के दिखाने के स्थान पर केमिस्ट की सलाह पर दवाओं का सेवन करते हैं जबकि यह उनकी ही सेहत के लिए घातक हो सकता है। कहना सिर्फ यही है कि जब तक बहुत ज्यादा जरूरी न हो एंटीबायोटिक दवाओं से परहेज करें। यदि एंटीबायोटिक दवाई लेनी है तो बिना किसी डॉक्टर के परामर्श के न लें क्योंकि लगातार एंटीबायोटिक दवाएं लेने से रोग प्रतिरोधक क्षमता घट जाती है।
किडनी की बीमारी का मुख्य कारण हाई ब्लड प्रेशर
पीलीभीत। सर गंगाराम अस्पताल के किडनी रोग विशेषज्ञ डॉ. वैभव तिवारी ने कहा कि किडनी संबंधी रोगों शुरूआत आमतौर पर हाई ब्लड प्रेशर के साथ होती ही होती है। इसलिए अपने ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखें। अगर पेशाब में खून आ रहा है या कोई और तकलीफ है तो क्रिएटिन की जांच कराएं। इससे आगे के इलाज हो जाएगा। देश में कुल आबादी में एक प्रतिशत लोग किडनी संबंधी बीमारियों से पीड़ित हैं। जहां तक किडनी संबंधी रोगों से बचाव के लिए पानी पीने की बात है। मेरा यही कहना है कि जितनी प्यास लगे उतना पानी पीएं। अनावश्यक तौर पर पानी पीने की जरूरत नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि डायबिटीज के रोगियों को पेशाब की जांच हर महीने करानी चाहिए, क्योंकि वे हाईरिस्क में होते हैं।
डाक्टरों पर सिर्फ जेनरिक दवाएं लिखने की पाबंदी अनुचित
पीलीभीत। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के हॉस्पिटल बोर्ड ऑफ इंडिया के चेयरमैन डॉ. शरद अग्रवाल ने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र के लिए कोई भी नया नियम या कानून लागू किया जाए तो उसका व्यवहारिक पक्ष जरूर देखा जाए। उन्होंने कहा कि हाल में ही नेशनल मेडिकल कमीशन ने प्रोफेशनल एथेक्सि पर 102 पेज का नोट बनाया है। इसमें कहा गया है कि चिकित्सक सिर्फ जेनरेक दवाएं ही लिखें लेकिन मेडिकल स्टोर संचालक को यह हक होगा कि मरीज को ब्राडेंड और जेनरिक दोनों तरह की दवाएं दे सकता है। डाक्टरों पर पाबंदी लगाने की बजाए सरकार को चाहिए कि ब्रांडेड दवाओं का प्रोडक्शन ही बंद करा दे। आईएमए ने इस नए प्रावधान का विरोध किया है। साथ ही नेशनल मेडिकल कमीशन के समक्ष अपना पक्ष रखा है।
सिर्फ दवाओं के भरोसे न रहें, जरूरत पर आपरेशन कराएं
पीलीभीत। यूरोलॉजिस्ट डॉ. अंशुमन अग्रवाल ने बताया कि गुटखा खाने से भी किडनी में कैंसर हो सकता है। उन्होंने कहा कि पेशाब में अगर रुकावट है तो तत्काल जांच कराएं। अब तो बचपन से पेशाब में रुकावट के मरीज सामने आ रहे हैं। इसलिए हर स्तर पर जागरूक रहें। उन्होंने कहा कि अगर 50 वर्ष से उम्र अधिक है तो अल्ट्रासाउंड और किडनी फंक्शन टेस्ट हर वर्ष कराएं। इससे कोई दिक्कत होगी तो सामने आएगी। डाक्टरों के साथ संवाद में उन्होंने कहा कि इलाज के मामले में सिर्फ दवाओं के भरोसे न रहें, अगर आपरेशन की जरूरत लगती है तो उसमें देरी न करें। भारत में चलन है कि आपरेशन लास्ट स्टेज में कराते हैं जबकि जरूरत के समय पर आपरेशन होने का फायदा अधिक है।
राज्यमंत्री ने किया आईएमए कॉन्फ्रेंस हॉल का किया लोकापर्ण
पीलीभीत। गन्ना विकास एवं चीनी मिल राज्यमंत्री संजय सिंह गंगवार ने आईएमए के नवनिर्मित कॉन्फ्रेंस हॉल का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि डाक्टरों की बदौलत वह इस मुकाम तक पहुंचे हैं। हर मोड़ पर डाक्टरों ने मार्गदर्शन दिया और सहयोग भी दिया। उन्होंने कहा कि डाक्टरों को आगे जिस भी सहयोग की जरूरत पड़ेगी। वह उसे देंगे। आईएमए भवन में आयोजित आईएमए कान 2022 के इस आयोजन में आएमए के अध्यक्ष डॉक्टर पीयूष अग्रवाल, सचिव रोहित सिंह पूरी टीम के साथ रहे। संरक्षक डॉ. एसके अग्रवाल, पूर्व अध्यक्ष डॉ तरुण सेठी, आई एमए बिल्डिंग के कमेटी अध्यक्ष डॉक्टर महेश चंद्र, सचिव डॉ. सौरभ अग्रवाल, डॉ. नीरज गुप्ता, रश्मि चौधरी कॉन्फ्रेंस में सहभागी रहे। नेशनल इंटीग्रेटेड एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डॉ अनिल सक्सेना, वरिष्ठ डॉक्टर पीडी सिंह डॉक्टर, केएन तिवारी, डॉ ज्ञान प्रकाश और सीएमओ डॉ. आलोक कुमार भी पहुंचे। ब्यूरो