सिख रेजीमेंट के हवलदार सुरेंद्र सिंह लवाणा को कारगिल में शहीद हुए 18 बरस हो गए। शहीद का परिवार आर्थिक रूप से संपन्न है। फार्मिंग के अलावा पेट्रोल पंप है। सरकार की ओर से दिल्ली में मिला फ्लैट किराए पर चल रहा है। शहीद के परिवारजनों के मुताबिक देश सेवा ही सच्ची सेवा है। बच्चों को फौज में भर्ती कराने के प्रयास फौज के अफसरों की ओर से हुए, लेकिन बच्चे कुछ दिन रुकने के बाद घर लौट आए।
तहसील क्षेत्र के गांव हरीपुर में चार जनवरी 1961 को उलागर सिंह के घर जन्मे शहीद सुरेंद्र ङ्क्षसह लवाणा की तमन्ना शुरू से ही फौज में भर्ती होकर देश सेवा करने की थी। 18 अगस्त 1988 को वे सेना में भर्ती हुए। कारगिल में पाकिस्तानी घुसपैठियों को खदेडने को उनकी तैनाती आपरेशन विजय के तहत जम्मू कश्मीर के द्रास सेक्टर में हुई थी। दस दिन के भीतर पाकिस्तानी घुसपैठियों से सिख रेजीमेंट की तीन मुठभेंड हुई। इस दौरान 29 मई 1999 को वे वतन की रक्षा को शहीद हो गए। सुरेंद्र सिंह को उच्च सेवा मेडल सहित कई मेडलों से पुरस्कृत किया गया। सरकार ने शहीद परिवार को कृषि भूमि के अलावा आश्रितों को पेट्रोल पंप आवंटित किया। दिल्ली में रहने को एक फ्लैट दिया गया। उनके पुत्र सुखविंदर सिंह का निधन वर्ष 2007 में कश्मीर जाते समय रास्ते में ट्रेन से गिरकर हो गया। परिवार में पत्नी गुरमीत कौर के अलावा पुत्र सुखविंदर सिंह की विधवा सतनाम कौर, सतनाम कौर का नौ वर्षीय पुत्र गुरुप्रीत सिंह, आठ वर्षीय पुत्री वीरेंद्र कौर, शहीद का दूसरा पुत्र रेशम सिंह, उसकी पत्नी अतेंद्र कौर, पांच वर्षीय पुत्री जसवीर कौर, दो वर्षीय पुत्र अभिजीत सिंह व शहीद की पुत्री पलविंदर कौर है। पलविंदर कौर की शादी नहीं हुई है।
पुत्रों को सेना में भर्ती कराने की ख्वाहिश रही अधूरी
पूरनपुर। शहीद सुरेंद्र सिंह की ख्वाहिश दोनों पुत्रों को सेना में भर्ती कराने की थी। उनके परिवार के लोग भी पुत्रों को सेना में भर्ती करवाना चाहते थे। सेना के अफसर कई साल पहले शहीद के घर आए और उनके दोनों छोटे-छोटे पुत्रों को साथ ले गए। सैनिक स्कूल में बेटों का दाखिला भी कराया गया, लेकिन कुछ दिन बाद दोनों बेटे घर को लौट आए।
क्षेत्रवासियों को याद नहीं आते शहीद सुरेंद्र
पूरनपुर। शहीद सुरेंद्र सिंह लवाणा की बरसी पर आज भी उनकी पत्नी गुरमीत कौर की आंखे नम हो जाती है। शहीद को याद करने के नाम पर गायत्री परिवार के संदीप खंडेलवाल ही पिछले कुछ सालों से उनके घर पहुंचकर शहीद की विधवा को सम्मामनित करते है।
बदहाल हो गई शहीद स्मृति वाटिका
पूरनपुर। शहीद सुरेंद्र सिंह लवाणा की याद में सामाजिक वानिकी ने नगर के प्रवेश द्वार पर जिला पंचायत की भूमि पर स्मृति वाटिका बनाई थी। स्मृति वाटिका में फल, फूल के पौध लगाए गए। चारों ओर से कटीलें तारों की बाड़ की गई और गेट बनवाया गया। पौधों की सिंचाई को हैंडपंप लगवाया गया। कुछ दिन तो सामाजिक वानिकी की ओर से स्मृति वाटिका की साफ-सफाई समय-समय पर कराई जाती रही। इसके बाद सामाजिक वानिकी के अफसर और वाटिका के उद्घाटन के समय शहीद की याद को ताजा रखने का संकल्प लेने वाले गणमान्य लोग शहीद को भूल गए। बाड में लगाया गया कांटों वाला तार, मुख्य गेट और हैंडपंप चोर चोरी कर ले गए। साफ-सफाई के अभाव में वाटिका बदहाल है। स्मृति वाटिका झाड़ी का रूप ले चुकी है। आसाम हाइवे चौड़ीकरण को लेकर वाटिका के कई वृक्षों को भी काट दिया गया।