जहानाबाद /पीलीभीत। प्रशासन की ओर से सावन के दूसरे सोमवार को सकुशल संपन्न कराने को लेकर पुख्ता बंदोबस्त किए गए थे, लेकिन जहानाबाद थाना क्षेत्र के शाही गांव में कांवड़ के रास्ते को लेकर विवाद हो गया। दूसरे पक्ष के लोगों ने नया रास्ता अपनाने का आरोप लगाते हुए विरोध किया तो तनातनी हो गई। कांवड़ियों को रोके जाने की सूचना मिलने पर एडीएम, एएसपी समेत कई अफसर मौके पर पहुंचे। करीब दो घंटे बाद विवाद का निस्तारण करा दिया गया। कांवड़ियों को तय रूट के अनुसार दूसरे रास्ते से निकलवाया गया। पूरे दिन गांव में अफसर डेरा जमाए रहे।
जहानाबाद थाना क्षेत्र से कई शिव भक्त कांवड़ यात्रा पर गए थे। सोमवार सुबह करीब आठ बजे कछला गंगाघाट से जल लेकर एक जत्था गांव पहुंचा। कांवड़िये दूसरे पक्ष के धार्मिक स्थल की तरफ से होकर निकलने लगे। इस पर दूसरे पक्ष के लोग जमा हो गए। उन्होंने नई परंपरा बताते हुए इसका विरोध किया। इधर, कांवड़ियों का कहना था कि वह पांच साल से इसी रास्ते से होकर निकल रहे हैं। तनाव की स्थिति बन गई। सूचना मिलने पर एडीएम अतुल कुमार, एएसपी रोहित मिश्र, एसडीएम सदर वंदना त्रिवेदी, सीओ सदर योगेंद्र कुमार पुलिस बल के साथ पहुंच गए। दोनों पक्ष खुद को सही बताते हुए अपनी मांग पर अडिग रहे। हालांकि बाद में अधिकारियों ने सरकारी अभिलेखों के आधार पर तय रूट के हिसाब से दूसरे रास्ते से कांवड़ियों को शिवालय तक पहुंचाया। पुलिस के अभिलेखों में 2018 से पहले का रूट दर्ज नहीं था। इसके बाद दूसरा जत्था हरिद्वार से जल लेकर दोपहर बाद पहुंचा, उसको भी इसी तरह से सख्त सुरक्षा के बीच निकलवाया गया।
दिन भर जमे रहे अफसर शाही गांव में कांवड़ियों के रास्ते को लेकर विवाद सामने आने के बाद पुलिस-प्रशासनिक अमला अलर्ट रहा। भारी पुलिस बल को तैनात कर दिया गया। इसके अलावा एडीएम-एएसपी समेत अधिकारी खुद गांव में कांवड़ियों के शिवालय पहुंचने तक जमे रहे।
दिखाते रहे वीडियों, अफसरों ने नकार दी
रूट को लेकर जब सवाल खड़े हुए तो पुलिस ने पहले अभिलेख चेक किए। इसमें कांवड़ियों द्वारा बताया जा रहा रास्ता उसमें शामिल नहीं निकला। इस पर कांवड़ियों ने पांच साल से गुजरने की बात कहते हुए पुराने वीडियो भी दिखाए, लेकिन अफसरों ने इसे नहीं माना। हालांकि एक सवाल सिस्टम पर उठा है कि अगर पांच साल से कांवड़िये गलत रास्ते से निकल रहे थे, तो फिर उनको उस वक्त रोका क्यों नहीं गया? इसकी जानकारी अभिलेखों में दर्ज क्यों नहीं की गई? अगर गलत नहीं थे फिर अब गलत क्यों बताया गया?
एक अफसर पर कांवड़ियों को धमकाने का आरोप
विवाद के दौरान प्रशासन काफी सख्त रहा। इस दौरान एक प्रशासनिक अफसर के व्यवहार पर भी सवाल उठाए गए। कांवड़ियों ने कहा कि एक तरफ सूबे के मुख्यमंत्री कांवड़ियों के स्वागत को लेकर सरकारी मशीनरी को निर्देशित कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ एक अफसर उनको लाठीचार्ज का डर दिखाकर दबाने का काम कर रहे हैं। इसको लेकर कांवड़ियों ने खासी नाराजगी भी जताई।
..तो बैठकों में औपचारिकता निभाते रहे अफसर
शाही गांव में बीते साल सावन माह में भी इसी तरह से कांवड़ियों के रास्ते को लेकर दिक्कत आई थी। इस बार भी पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों का दावा है कि उन्होंने गांव में दो- दो बार संभ्रांत नागरिकों संग बैठक की थी। इसमें रास्ते का कोई विवाद नहीं रखा गया था। अब दिक्कत आने के बाद पूरा अमला गांव में जुटा रहा। यह कहना गलत नहीं होगा कि बैठकों के दौरान अधिकारी सिर्फ औपचारिकता निभाते रहे।
ऐमी गांव पर भी रखी गई नजर
जहानाबाद थाना क्षेत्र का मिश्रित आबादी वाला गांव ऐमी भी अति संवेदनशील श्रेणी में रहता है। यहां पर बीते सालों में सावन माह और अन्य पर्वों पर विवाद हो चुके हैं। इसके चलते सोमवार को ऐमी गांव में भी विशेष नजर रखी गई। पुलिस बल की सुबह से ही तैनाती कर दी गई। अफसर भी राउंड लेकर हालात परखते रहे।
कांवडिय़ों के रूट को लेकर विवाद की स्थिति बन गई थी। मौके पर पहुंचकर पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों ने तय रूट के अनुसार कांवड़ियों को शिवालय तक पहुंचाया है। कांवड़िये दूसरे रास्ते को परंपरागत बता रहे थे, इसकी वीडियो भी दिखाई गई थी, लेकिन वह हमारे अभिलेखों में नहीं था। किसी तरह का तनाव अब नहीं है।
- रोहित मिश्र, एएसपी