डेयरी खोलकर रोजगार शुरू करने वालों के लिए प्रदेश सरकार ने गोपालक योजना शुरू की है। इसके तहत बैंक से दो किस्तों में ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। नौ लाख की इस योजना में विभाग से 40 हजार रुपये प्रति वर्ष के हिसाब से पांच साल तक अनुदान दिया जाएगा।
सपा सरकार ने प्रदेश में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए कामधेनु योजना शुरू की थी, लेकिन बड़ी योजना होने के चलते सामान्य किसान या पशुपालक इसे नहीं अपना सके, जिससे योजना पूंजीपतियों तक समिति रही। अब भाजपा सरकार ने कामधेनु योजना को बंद कर गोपालक योजना शुरू की है। इसके तहत पशुपालक पांच या दस पशुओं की डेयरी खोल सकते हैं। दो चरणों में चलने वाली इस योजना के तहत पहले चरण में पांच और दूसरे चरण में पांच पशु खरीदने के लिए धनराशि दी जाएगी। पशुपालक को पशु शेड खुद तैयार कराना होगा। इसके बाद बैंक से ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। बैंक से प्राप्त इस धनराशि पर लगने वाले ब्याज पर अनुदान न देकर विभाग से प्रति वर्ष 40 हजार रुपये का एक मुश्त अनुदान दिया जाएगा।
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कुल नौ लाख की है योजना
गोपालक योजना की कुल लागत नौ लाख रखी गई है। इसमें पशुपालक को 10 पशुओं के हिसाब से 1.80 लाख की लागत से पशुशाला स्वयं बनानी होगी, जो मार्जिन मनी के रूप में मानी जाएगी। इसके बाद पशुपालन विभाग से आवेदन अनुमोदित होने पर बैंक से पहले साल पांच पशुओं के लिए 3.60 लाख रुपये दिए जाएंगे। यदि पशुपालक पांच पशु ही पालन चाहते हैं तो दूसरी किस्त नहीं मिलेगी, यदि वे और पशु पालन चाहते हैं तो 3.60 लाख रुपये की दूसरी किस्त बैंक से उपलब्ध कराई जाएगी।
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कहीं से भी खरीद सकते हैं पशु
कामधेनु योजना में सबसे बड़ी दिक्कत पशुओं को यूपी से बाहर से खरीदने की शर्त थी, लेकिन गोपालक योजना में ऐसी कोई शर्त नहीं है। पशुपालक अपनी सुविधा के अनुसार कहीं से भी दुधारू पशु खरीद सकते हैं।
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विभाग से बैंक में सीधे पहुंचेगा अनुदान
गोपालक योजना की कुल नौ लाख की लागत में 1.80 लाख रुपये पशुपालक को लगाने हैं। शेष 7.20 लाख रुपये की धनराशि पर बैंक 40 हजार रुपये प्रति वर्ष के हिसाब अनुदान देगा। वहीं यदि पशुपालक केवल पांच पशु ही पालते हैं तो अनुदान की राशि 20 हजार रुपये प्रति वर्ष अनुदान दिया जाएगा। यानी पांच पशु पालने पर एक लाख और 10 पशु पालने पर दो लाख रुपये अनुदान मिलेगा।
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कम पूंजी के पशुपालकों के लिए गोपालक अच्छी योजना है। मात्र 1.80 लाख की धनराशि लगाकर डेयरी खोल सकते हैं। हालांकि अभी जिले का लक्ष्य नहीं मिला। लक्ष्य मिलते ही आवेदन जमा कराए जाएंगे। - डॉ. ज्ञान प्रकाश सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी