कलीनगर। पीटीआर में बाघों के बढ़ते कुनबे के साथ ही संरक्षण और मानव वन्यजीव संघर्ष रोकना भी चुनौती बनता जा रहा है। कलीनगर क्षेत्र में हालात ज्यादा खराब हो रहे हैं। बीते छह माह में पांच लोगों की बाघ के हमले में मौत हो चुकी है। सभी घटनाएं दस किलोमीटर दायरे में ही हुई हैं। लगातार हो रही घटनाओं के बाद लोग कलीनगर क्षेत्र को मानव वन्यजीव संघर्ष का गढ़ मानने लगे हैं।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) का जंगल पांच वन रेंजों में बंटा हुआ है। इसमें कलीनगर तहसील क्षेत्र में तीन रेंजों की सीमा पड़ती है। इसमें महोफ और माला का जंगल भी शामिल हैं। पीटीआर में बाघों की संख्या बढ़ने के साथ जंगल से बाहर तेजी के साथ चहलकदमी बढ़ गई है। रोकथाम के दावों के बीच छह माह से कलीनगर तहसील के कई गांव दहशत में भी हैं।
यहां 28 जून को रानीगंज गांव में पहली घटना हुई थी। खेत पर काम कर रहे किसान लालता प्रसाद को बाघ ने मार दिया था। इसके बाद हमले की घटनाएं जारी रहीं। शुक्रवार को छह माह के अंदर बाघों के हमलों में पांचवीं मौत की घटना सामने आई। खास बात यह है कि सभी घटनाएं दस किलोमीटर के दायरे में हुईंं। विरोध के बीच आश्वासन का दौर जारी रहा, लेकिन मानव वन्यजीव संघर्ष रोकने के नाम पर अमल होता दिखाई नहीं दिया।
कलीनगर क्षेत्र से पकड़ी जा चुकी हैं दो बाघिन
पीटीआर बनने के बाद दो माह के अंतराल में दो बाघिन पकड़ी जा चुकी हैं। यहां बता दें कि पहली बाघिन कलीनगर तहसील में जमुनिया और दूसरी अटकोना गांव से पकड़ी जा चुकी है। दोनों को पीटीआर के जंगल में ही छोड़ दिया गया है।
जाल फेंसिंग में देरी भी बन रही घटनाओं की वजह
कलीनगर तहसील के जिस क्षेत्र में बाघ के हमलों की घटनाएं सामने आ रहीं हैं, वहां जंगल सीमा पर जाल की फेंसिंग नहीं लगी है। ऐसे में इंसानों के साथ बाघों की जंगल और उसके बाहर आवाजाही जारी है। इसकी वजह से मानव वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं नहीं रुक पा रहीं। हालांकि विभाग की ओर से जाल फेंसिंग के कार्य के लिए टेंडर आमंत्रित किया गया है, लेकिन अनियमितताओं के चलते मामला कोर्ट में चले जाने से कार्य शुरू नहीं हो सका।