टाइगरों के जंगल से बाहर निकलने की बढ़ रही घटनाओं पर अंकुश लगाने को टाइगर रिजर्व के डिप्टी रेंजरों के चार सदस्यीय दल ने जिम कार्बेट पार्क में हुए तीन दिवसीय प्रशिक्षण में भाग लिया। यह दल अब टाइगर रिजर्व के अन्य कर्मियों के साथ अपने अनुभवों का साझा करेगा। टाइगर रिजर्व बनने के बाद वनों पर मानवों की निर्भरता कम होने के साथ आवाजाही पर भी अंकुश लगा है। ऐसे में जंगलों में वन्य जीवों की संख्या में अपार वृद्धि हुई है। इसके चलते वन्य जीव जंगल से सटे इलाकों में खड़ी फसलों की ओर दौड़ने लगे हैं। शाम होते ही वन्य जीवों का झुंड जंगलों से सटे इलाके में खड़ी कृषि फसलों पर टूट पड़ता है। वन्य जीवों की तलाश में ही टाइगर भी उनका पीछा करते हुए मैदानी इलाकों में पहुंच रहे हैं। यही वजह है कि मानव पर टाइगर हमले की घटनाओं में तेजी से इजाफा हो रहा है। इधर सामाजिक वानिकी के उप प्रभागीय वनाधिकारी केपी सिंह के नेतृत्व में टाइगर रिजर्व के माला रेंज के डिप्टी रेंजर वजीर हसन, महोफ रेंज के मोबीन आरिफ, बराही के ग्रीशचंद श्रीवास्तव समेत चार सदस्यीय दल तीन दिवसीय प्रशिक्षण को जिम कार्बेट पार्क गया था। प्रशिक्षण के दौरान डिप्टी रेंजरों को जंगलों से बाहर टाइगर के निकलने के कारणों व उस पर अंकुश लगाने के बारे में विस्तार से बताया गया। प्रशिक्षण प्राप्त कर लौटा चार सदस्यीय दल अब अपने अनुभवों को टाइगर रिजर्व के वनकर्मियों के साथ साझा करेंगे। मालूम हो कि हाल ही मे हल्दीडेंगा व पिपरिया संतोष इलाके में टाइगर अब तक तीन लोगों को अपना निवाला बना चुका है।