शहर से सटे गांव गौहनिया में फुंके ट्रांसफार्मर को न बदलने जाने से लोगों
का गुस्सा फूट पड़ा। गुस्साए तमाम ग्रामीणों ने प्रदर्शन कर नारेबाजी की
और जेई का पुतला फूंका।
गांव गौहनियां निवासी रामपाल, लक्ष्मण प्रसाद,
जगदीश, जितेंद्र, छदम्मीलाल आदि ने बताया कि गांव में करीब दो हजार
कनेक्शन हैं। बिजली विभाग ने महज 100 केवीए का ट्रांसफार्मर लगा रखा है।
ओवरलोड के कारण ट्रांसफार्मर आए दिन फुंक जाता है। शिकायत के बाद भी बिजली
विभाग के अधिकारी कोई ध्यान नहीं देते हैं। 15 दिन पहले ट्रांसफार्मर फुंक
गया। तमाम शिकायतों के बाद भी ट्रांसफार्मर नहीं बदला गया।
इससे गुस्साए
तमाम ग्रामीणों ने गांव के मुख्य चौराहा पर प्रदर्शन किया और जेई का पुतला
फूंका। ग्रामीणों ने अधिक क्षमता का नया ट्रांसफार्मर लगवाने की मांग की
है। प्रदर्शन करने वालों में टिंकू शर्मा, मदनलाल, मोहम्मद यासीन, योगेश
वर्मा, बाबूराम शर्मा, प्रदीप कुमार, रामदास, सीताराम वर्मा, ओमप्रकाश,
इंद्रपाल, सूरजकुमार, रोहित, श्रीरामपाल, नन्हेलाल वर्मा आदि शामिल रहे।
सावधान, ओवरलोड ट्रांसफार्मरों से है हादसे का खतरा
पीलीभीत।
भीषण गर्मी में लगे बिजली ट्रांसफार्मर ओवरलोडिंग से कराह रहे हैं। लगभग
सभी ट्रांसफार्मरों पर बिजली सप्लाई का जबरदस्त दबाव है, जिसकी वजह से कौन
से ट्रांसफार्मर कब जल या फुंक जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता। ऐसे में शहर की
गली-मोहल्लों में लगे ट्रांसफार्मर कभी भी किसी के लिए जानलेवा भी साबित हो
सकते हैं।
सवा दो लाख आबादी वाले इस शहर में करीब सवा दो सौ
ट्रांसफार्मरों से बिजली आपूर्ति की जा रही है। इसमें 26 ट्रांसफार्मर चार
सौ केवीए और दो 603 केवीए के लगे हैं। बाकी ढाई सौ और सौ केवीए के हैं। इन
ट्रांसफार्मरों पर शायद ही किसी ट्रांसफार्मर में ओवरलोडिंग न हो। भीषण
गर्मी के चलते बिजली की बढ़ी मांग और ओवरलोड के चलते ट्रांसफार्मर कब फुंक
जाएं। कुछ नहीं कहा जा सकता है।
ऐसे में शहर में लगे इन ट्रांसफार्मरों से
हर वक्त हादसे का खतरा मंडरा रहा है। मोहल्ला तुलाराम, नखासा, छोटी
मार्केट, दुधिया मंदिर के पास, लाल रोड, थान सिंह सहित कई मोहल्लों में लगे
ट्रांसफार्मर से नजदीक निकलने के दौरान कोई भी किसी वक्त बड़े हादसे का
शिकार हो सकता है। चिंताजनक यह है कि बिजली विभाग इस ओर कोई ध्यान नहीं दे
रहा है।
ट्रांसफार्मरों पर लगे अधिकांश मीटर खराब
विभाग
ने लाखों रूपये खर्च कर ट्रांसफार्मरों पर मीटर लगवाए थे। ताकि कर्मचारी
को यह जानकारी मिल सके कि किस ट्रांसफार्मर पर ओवरलोडिंग है और कहां कम।
इससे अधिक बिजली खपत वाले मोहल्लों में ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाई जा
सके, लेकिन शहर के आधे से अधिक ट्रांसफार्मरों पर लगे यह मीटर खराब हैं।
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एसडीओ
टाउन दीपक नेगी ने बताया कि ट्रांसफार्मरों पर लगे अधिकांश मीटर खराब हैं।
जिससे किस ट्रांसफार्मर पर ओवरलोडिंग है। यह जानकारी नहीं पाती। पावर
हाउसों के मीटरों से यह जानना मुश्किल होता है कि किस ट्रांसफार्मर पर अधिक
लोड है। इससे ट्रांसफार्मरों के जलने व फुंकने की घटनाएं भी होती रहती है।
दोपहर बाद शोपीस बन जाते हैं पंखे
बीसलपुर।
सीएचसी में लगे पंखे दोपहर बिजली जाने के बाद शोपीस बन जाते हैं। नगर मेें
रात और दिन में छह बजे से 12 बजे तक बिजली रहती है। दोपहर 12 बजे बिजली
जाते ही पंखे शोपीस बन जाते हैं। इससे स्टाफ, मरीज और तीमारदारों को काफी
दिक्कतें होती हैं। सीएचसी में बिजली की वैकल्पिक व्यवस्था के लिए एक बड़ा
जनरेटर लगा हुआ है, लेकिन डीजल मद में बजट न के बराबर होने के कारण जनरेटर
नहीं चलाया जाता। सीएचसी प्रभारी डॉ ठाकुर दास ने बताया कि डीजल की मद में
बजट बढ़ाने को लेकर सीएमओ को पत्र भेजा गया है।