अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने पिछड़ा वर्ग की श्रेणी में शामिल करने समेत विभिन्न मांगों को लेकर धरना दिया। धरना स्थल पर पहुंचे सिटी मजिस्ट्रेट को राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपा।
संघर्ष समिति के राष्ट्रीय सचिव अनिल चौधरी के नेतृत्व में सोमवार को जाट समुदाय के तमाम लोग नेहरू ऊर्जा उद्यान में एकत्र हुए। यहां उन्होंने जाट समाज को पिछड़ा वर्ग श्रेणी की केंद्रीय सूची के तहत प्राप्त आरक्षण से बाहर करने के विरोध में धरना दिया। धरनास्थल पर हुई सभा में राष्ट्रीय सचिव ने कहा कि जाट समाज को सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद पिछड़ा वर्ग की आरक्षण सूची से बाहर कर दिया। जबकि यह आरक्षण आठ दस वर्षों तक चले संघर्ष के बाद गत वर्ष दिया गया था। प्रधानमंत्री ने आरक्षण देने के निर्णय को बहाल कराने का प्रयास करने का आश्वासन भी दिया था। इस बीच ारक्षण के आधार पर नौकरी पा चुके बेरोजगार युवाओं को नौकरी ज्वाइन करने से वंचित कर दिया गया। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इधर धरनास्थल पर पहुंचे सिटी मजिस्ट्रेट को राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में 15 मार्च से पूर्व केंद्रीय बैंकिंग की परीक्षा पास कर चुके युवाओं को ज्वाइन कराने, कानून बनाकर जाटों को पिछड़ा वर्ग श्रेणी में शामिल करने, जिन प्रदेशों में जाटों को आरक्षण नहीं मिला है उन्हें आरक्षण दिलाने, एसबीसी आरक्षण मुद्दे की हरियाणा सरकार द्वारा केस की पैरवी करने, पिछड़ा वर्ग के प्रमाणपत्रों को लेकर भ्रम की स्थिति समाप्त कर जिलाधिकारियों को निर्देशित करने, सिख जाटों को पिछड़े वर्ग का प्रमाणपत्र ऑनलाइन जारी करने की मांग की गई। विजय कुमार, शिवराज सिंह, ओमकार सिंह, अभय सिंह, मान सिंह, जबर सिंह, संदीप सिंह, करन सिंह, देवेंद्र सिंह, हरवेंद्र सिंह, संतोष सिंह, महावीर सिंह, त्रिवेंद्र सिंह, गुरविंदर सिंह, मानिक राम चौधरी आदि शामिल रहे।