पीलीभीत। पीलीभीत टाइगर रिजर्व के जंगल क्षेत्र में आमान परिवर्तन के कार्य को जल्द हरी झंडी मिल सकती है। स्ट्रिप कैमरों से मिला डाटा परीक्षण के बाद भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून भेज दिया गया है। वहां से एनटीसीए को भेजा जाएगा। 30 मार्च को नेशनल बोर्ड ऑफ वाइल्ड लाइफ की बैठक होनी है। अनुमान है कि इसी बैठक में एनओसी का मामला तय किया जाएगा।
पीलीभीत-मैलानी रेल खंड पर साढ़े छह किलोमीटर में पीलीभीत टाइगर रिजर्व का जंगल पड़ता है। इस क्षेत्र में ब्राडगेज लाइन बिछाने से पूर्व कार्यदायी संस्था रेलवे विकास निगम लिमिटेड ने एनओसी लेने के लिए नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अॅथारिटी (एनटीसीए) में आवेदन किया था। वर्ष 2016 में वन विभाग और 2018 में पर्यावरण संबंधी एनओसी जारी कर दी गई थी। अव वन्यजीवों को लेकर एनओसी दी जानी है। इसको लेकर वन मंत्रालय ने माला रेंज में रेलवे ट्रेक बिछाने से पूर्व वन्यजीवों की सुरक्षा से जुड़े जरूरी उपायों का निरीक्षण करने के लिए तीन सदस्यीय टीम बनाकर दो माह में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था।
वन मंत्रालय के निर्देश पर टीम में शामिल भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून के डॉ. कौशिक बनर्जी, पीटीआर के डिप्टी डायरेक्टर नवीन खंडेलवाल और पूर्वोत्तर रेलवे के डीजीएम राकेश सक्सेना ने छह मार्च से तीन दिन तक जंगल क्षेत्र का गहनता से निरीक्षण किया था। वन्यजीवों के आंकलन को 31 स्ट्रिप कैमरे लगाए गए थे। टीम ने पांच अंडरपास, दो किमी क्षेत्र में दोनों ओर तार फेंसिंग और ट्रेन की रफ्तार 20 किमी प्रति घंटा रखने की रूपरेखा तैयार की। कैमरों के फुटेज देखने के बाद फाइनल रिपोर्ट तैयार होने थी। अफसरों के निर्देश पर 17 मार्च को सभी कैमरे खोल लिए गए। कैमरों से मिले डाटा का परीक्षण किया गया। परीक्षण के बाद डाटा को डब्ल्यूआईआई देहरादून को भेजा गया है।
माला रेंज में प्रस्तावित आमान परिवर्तन वाले क्षेत्र में लगाए गए सभी कैमरों के डाटा का गहनता से परीक्षण किया गया। संबंधित डाटा डब्ल्यूआईआई को भेजा गया है। जहां से फाइनल रिपोर्ट तैयार कर भेजी जाएगी। - नवीन खंडेलवाल, डिप्टी डायरेक्टर, पीलीभीत टाइगर रिजर्व