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रात में बछड़े को घर से उठा ले गया तेंदुआ.. सिहरे लोग

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माधोटांडा। इंडो नेपाल सीमा क्षेत्र में तेंदुए की दहशत कायम है। वन विभाग के प्रयास केवल निगरानी तक सीमित है। शुक्रवार रात जंगल से बाहर निकला तेंदुआ बूंदीभूड़ गांव की सीमा में जा पहुंचा और एक घर में घुसकर आंगन में बंधे बछड़े को खींचकर खेत में ले जाने के बाद निवाला बना लिया। आबादी के बीच तेंदुए की दस्तक से ग्रामीणों में दहशत मची है।
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टाइगर रिजर्व की बराही रेंज के अंतर्गत नौजल्हा जंगल क्षेत्र से बाहर करीब एक साल से तेंदुए की दहशत कायम है। दस किमी दायरे में चहलकदमी कर तेंदुए आबादी क्षेत्र में घुसकर मवेशियों को निवाला बना रहे हैं। अब तक कई दर्जन मवेशियों को निवाला भी बना चुके हैं। इस बीच क्षेत्र से तीन तेंदुओं को पिंजरे में कैद किया जा चुका है, लेकिन इसके बाद भी क्षेत्र में तेंदुए की चहलकदमी नहीं बनी हुई है। इधर पिछले दो माह से गभिया सहराई, महाराजपुर, नौजल्हा, बंदूीभूड़ समेत गांव में तेंदुए की चहलकदमी से लोगों में दहशत है। शुक्रवार रात बूंदीभूड़ गांव में घुसे तेंदुए ने वहां निवासी नगेंद्र के घर में बंधे बछड़े पर हमलाकर दिया। बछड़े को जबड़े में दबाकर बाहर गन्ने के खेत में ले गया और निवाला बना लिया। आहट पर जागे ग्रामीणों के शोर मचाने पर तेंदुआ बछड़े का आधा मांस छोड़कर जंगल की ओर निकल गया। सूचना के बाद शनिवार सुबह क्षेत्रीय वनकर्मी मौके पर पहुंचे। रेंजर वजीर हसन ने बताया कि तेंदुए की चहलकदमी को ध्यान में रखते निगरानी बढ़ा दी गई है। ग्रामीणों को भी सतर्क रहने की अपील की गई है।
ग्रामीणों का आक्रोश न बढ़ा दे मुश्किलें
बराही रेंज के सीमावर्ती इलाके में जंगल छोटा-छोटा भू-भाग है। इनके चारों ओर आबादी है। तेंदुए लगातार आबादी क्षेत्र में दस्तक देकर मवेशियों को निवाला बना रहे हैं। इससे ग्रामीणों में आक्रोश पनप रहा है। पूर्व वर्षों में क्षेत्र में एक तेंदुए की दस्तक बढ़ी थी। रोकथाम न होने से लोगों का रुझान मानव वन्यजीव संघर्ष की ओर बढ़ गया था। इसके कुछ समय बाद नौजल्हा जंगल में एक तेंदुए का शव भी मिला था। जिसकी मौत को स्वाभाविक बता दिया गया। ऐसे में अफसरों को निगरानी बढ़ाकर रणनीति तैयार करनी चाहिए।
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