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सिंचाई परियोजनाओं को है संजीवनी की दरकार

Sun, 26 Mar 2017 09:59 PM IST
पीलीभ्ाीत ब्यूराो
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प्रदेश के सिंचाई मंत्री को बुंदेलखंड के साथ रूहेलखंड की ऐसी सिंचाई परियोजनाओं को भी अमली जामा पहनाना होगा, जिसमें हीला हवाली के चलते कभी भी रूहेलखंड के कई जनपदों के साथ प्रदेश के करीब एक दर्जन जनपदों की लाखों एकड़ कृषि भूमि के लिए सिंचाई का संकट पैदा हो सकता है। इसमें शारदा सागर डैम भी शामिल है। जो जर्जर हालत में भी सूखा पडने या पहाड़ों से नहरों में पानी न मिलने की दशा में प्रदेश की सिंचाई की खपत को पूरा करता है।
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एशिया का मिट्टी से बना 22 किमी लंबा शारदा डैम, जिसे प्रथम व द्वितीय पंचवर्षीय योजना में बनाकर तैयार किया गया था। इस डैम मे भंडार किए जाने वाले पानी से उन्नाव, रायबरेली तक के जनपदों की लाखों एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई की जाती है। सूखा पड़ने पर डैम में भंडार किया गया पानी ही कृषि फसलों के लिए रामबाण साबित हो रहा है। शारदा डैम में बनने के कुछ वर्षों के बाद से ही भ्रष्टाचार की जंक लग गई और साल दर साल डैम की हालत जर्जर होती चली गई। इधर एक बार शासन ने सख्ती दिखाकर डैम के दो सहायक अभियंता पांच अवर अभियंता समेत दो बाबुओं को निलंबित भी किया था, लेकिन उसके बाद डैम में सत्ता से जुड़े ठेकेदारों के हाथों में बागडोर पहुंच गई। बताते हैं कि तभी से डैम की हालत और जर्जर होती गई। जर्जर होते जा रहे डैम की मरम्मत को एक बार 19 करोड़ व एक बार दस करोड़ रुपया मिला, लेकिन हालत जस की तस रही और रकम का बंदरबाट हो गया। जानकारों के मुताबिक डैम सिल्ट से लगभग डेढ़ किमी तक पट गया है और पानी भंडारण की क्षमता घट गई।
सिंचाई विभाग ने तत्कालीन सरकार के सिंचाई मंत्री शिवपाल सिंह यादव के डैम पर दौरे के बाद उनके निर्देश पर चार सौ करोड़ की लागत का एक प्रोजेक्ट, सिल्ट निकालने को साढ़े सात करोड़ की लागत का एक प्रोजेक्ट, डैम की डैमेज पड़ी सभी ड्रेन व आउट फ्लो की मरम्मत का सात करोड़ का प्रोजेक्ट, जीरो किमी से 22 किमी तक डैम के मार्ग बनाने व पिचिंग मरम्मत को छह करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट बनाकर भेजा गया था। बताते हैं कि शासन स्तर पर सत्ता के नजदीकी ठेकेदार व सत्ता से जुड़े अभियंता अपने-अपने यहां के प्रोजेक्ट मंजूर कराकर खेल खेलते रहे और डैम की हालत जर्जर होती गई। मात्र इन प्रोजेक्टो में एक छह करोड़ का प्रोजेक्ट डैम की पिचिंग मरम्मत का स्वीकृत हुआ और उसमें भी मात्र दो करोड़ मिला। आरोप है कि इसमें पिचिंग मरम्मत व पाइपिंग बोर करने के नाम पर खेल खेला गया। हालांकि इसमें गड़बड़ी की जांच भी शासन स्तर पर हुई, लेकिन मामला दबा दिया गया।
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इधर प्रदेश के सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह ने अपनी पहली बैठक में लंबित परियोजनाओं का मामला भी गंभीरता से लिया। यदि उन्होंने शारदा डैम की दुर्दशा सुधारने पर ध्यान दिया तो रूहेेलखंड के साथ प्रदेश के करीब एक दर्जन जनपदों की लाखों एकड़ कृषि भूमि को आसानी से सिंचाई के लिए पानी मुहैय्या हो सकेगा। यदि यूं ही हीला हवाली जारी रही तो आने वाले दिनों में व सूखा पड़ने पर सिंचाई को बड़ा संकट भी पैदा हो सकता है ।
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शारदा डैम का सिल्ट सफाई का प्रोजेक्ट तो काफी बड़ा है, लेकिन डैम के मार्ग खस्ता हालत के दो प्रोजेक्ट सीमित खर्चे के हैं। यदि उन पर बजट मिल जाता है तो डैम को नई ऊर्जा मिल सकती है। पिचिंग प्रोजेक्ट पर पूरी धनराशि मिलने से डैम में पानी भंडारण की क्षमता भी बढ़ जाएगी।
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- धर्म घोष, सहायक अभियंता, शारदा सागर प्रथम
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