कलीनगर। एशिया के सबसे बड़े मिट्टी के बांधों में शुमार शारदा सागर डैम की सुरक्षा को लेकर सिंचाई विभाग लंबे अंतराल के बाद सक्रिय होता नजर आ रहा है। विभाग ने डैम के वर्जित क्षेत्र में बांध सुरक्षा अधिनियम-2021 के तहत वैधानिक चेतावनी बोर्ड लगाने शुरू कर दिए हैं। हालांकि सवाल यह उठ रहे हैं कि जब वर्षों से डैम के शून्य से 22 किलोमीटर तक वर्जित क्षेत्र में अतिक्रमण, खेती और निर्माण होता रहा, तब विभाग की निगरानी और कार्रवाई कहां थी।
शारदा सागर डैम का निर्माण प्रथम पंचवर्षीय योजना के दौरान दो चरणों में किया गया था। डैम की सुरक्षा को लेकर उस समय कड़े नियम लागू थे। वर्जित क्षेत्र में लोगों और मवेशियों के प्रवेश पर रोक रहती थी। बाहरी हिस्से की सीपेज और लॉन्ग ड्रेन की नियमित सफाई कराई जाती थी ताकि बांध की संरचना सुरक्षित रहे। डैम की मुख्य बॉडी के आसपास किसी भी प्रकार का अतिक्रमण दंडनीय माना जाता था।
समय बीतने के साथ सुरक्षा व्यवस्था शिथिल पड़ती गई। आज स्थिति यह है कि डैम के वर्जित क्षेत्र में बड़े पैमाने पर कच्चे और पक्के मकान बन चुके हैं। कई स्थानों पर खेती हो रही है, दुकानें संचालित हैं और पक्की सड़कें भी बन गई हैं।
अब सिंचाई विभाग ने डैम के चयनित स्थानों पर वैधानिक चेतावनी बोर्ड लगाए हैं। इनमें स्पष्ट किया गया है कि डाउनस्ट्रीम स्लोप पर रास्ता बनाना, चलना, खेलना और मवेशी चराना प्रतिबंधित है। डैम टॉप रोड पर चढ़ने-उतरने के लिए केवल विभाग द्वारा बनाए गए रैंप का उपयोग किया जाए। जलाशय में मछली पकड़ना, नाव चलाना और तैरना दंडनीय अपराध है। बांध की संरचना को नुकसान पहुंचाना और ड्रेनों में गंदगी करना भी प्रतिबंधित किया गया है। उल्लंघन करने पर बांध सुरक्षा अधिनियम-2021 की धारा-41 के तहत दो वर्ष तक की सजा, जुर्माना या दोनों का प्रावधान बताया गया है।
अधिशासी अभियंता पीके गौतम ने बताया कि बांध सुरक्षा अधिनियम का पालन कराने पर जोर दिया जा रहा है। क्षेत्रीय टीम को निगरानी के निर्देश भी दिए गए हैं। संवाद