पहाड़ों पर भारी वर्षा के चलते शारदा, वमनी और जगबूड़ा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा है। जिले में यह नदियां शारदा से मिलकर तबाही मचाने लगी हैं। शारदा रमनगरा बुझिया क्षेत्र में कटान करती हुई किनारे आ चुकी है। यदि कटान की यही गति रही तो नदी रमनगरा बुझिया से बिजौरीखुर्द के जंगल का सफाया करती हुई धुरिया पलिया की ओर बढ़ सकती है।
शारदा नदी में नोमेंस लैंड पर जगबूड़ा नदी का संगम है। यहां से दोनों नदियां मिलकर जब आगे बढ़ती हैं तो बारिश के दिनों में खासी तबाही मचाती हैं। इस बार बाढ़ खंड ने करोड़ों रुपये खर्च कर तबाही को रोकने की कोशिश की है। हालांकि अभी शारदा में पिछले वर्षों की भांति बाढ़ नहीं आई है। ऐसे में यदि नदी में बाढ़ आती है तभी यहां कराए गए बाढ़ नियंत्रण कार्यों का पता लगेगा कि वे कितने कारगर हैं। यह सही है कि यहां जिओ ट्यूब से बांध बनाए जाने से नदी का कटान तो रुका ही है साथ ही नदी बायें किनारे की ओर कटान करती हुई आगे बढ़ी है।
बिजौरा जंगल, धुरिया पलिया भी बन सकती है निशाना
नेपाल की वमनी नदी का संगम भी गुन्हान के निकट शारदा में होता है। यहां शारदा ने पिछले वर्षों में जो जमीन छोड़ी थी, उस पर किसान खेती करने लगे थे। वह समूची भूमि नदी के गर्भ में समा चुकी है और यहां नदी भी किनारे आ गई है। ऐसे में नदी अब रमनगरा बुझिया एवं बिजौरी खुर्द कलां में ताजा कटान करने लगी है। यदि कटान की गति पिछले दिनों की तरह रहती है तो नदी बिजौरा का जंगल काटकर धुरिया पलिया को निशाना बना सकती है।
नलडेंगा से नगरिया तक कटान शुरू
नगरिया खुर्द कलां में स्पर 9 ए और 9 बी पर भी पानी का दबाव बना हुआ है, लेकिन पत्थर के स्पर होने के चलते अभी खास क्षति नहीं हुई है। यहां नदी नलडेंगा से नगरिया तक दायें किनारे की ओर लगातार कटान करती जा रही है। कंजिया सिंहपुर और नलडेंगा में सनेढ़ी तटबंध के बने दो स्परों की नोज को नदी ने शुक्रवार से कटान कर समेट लिया। ऐसे में यदि तत्काल उन स्परों के बचाव के लिए कोई कार्य नहीं कराए गए तो स्थिति खराब हो जाएगी।
एक्सईएन ने स्परों का किया निरीक्षण
बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता मिन्हाज अहमद ने शनिवार को अभियंता के साथ नौजल्हा नंबर दो और नगरिया खुर्द कलां में बने स्परों का निरीक्षण किया। उन्होंने सहायक अभियंता श्याम सिंह बघेल को स्पर बचाने के लिए जरूरी उपाय करने के निर्देश दिए।
धान, गन्ना की फसल तबाह
शारदा नदी की बाढ़ से रमनगरा बुझिया के चित्तो मंडल और डॉ. सुरेश की दो-दो एकड़ गन्ना, विष्णु राह, छोटू राह, रतन मंडल, तारक मंडल की धान की फसल नदी में समा गई है। इसके अलावा नगरिया के सुशांत ढाली की डेढ़ एकड़ जमीन नदी ने काट दी है।